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अण्डा खाना स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक और कितना हानिकारक

अण्डा खाना स्वास्थ्य के लिए कितना लाभदायक और कितना हानिकारक

अण्डा भारत के कोने-कोने में अर्थात सम्पूर्ण भारत में सर्वत्र सुलभ है, सस्ता भी है, जिसे हर व्यक्ति आसानी से इस्तेमाल कर सकता है। अण्डे का सेवन वयस्क, बच्चे तथा बुजुर्ग सभी के द्वारा किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आवश्यकता व उम्र के आधार पर किसी भी आहार की मात्रा अलग-अलग होती है। अधिक या कम मात्रा में तथा सही ढंग से अण्डे का सेवन न किये जाने पर अण्डे का सेवन हानिकारक हो जाते हैं। इस आलेख में हम अण्डे में पाये जाने वाले तत्वों, अच्छे अण्डे की पहचान, अण्डे के सेवन की मात्रा, अण्डा पकाने की विधि, अण्डा स्टोर करने की विधि, अण्डा खाने के स्वास्थ्य लाभ व हानि आदि तथ्यों पर प्रकाश डाला जा रहा है। इस लेख का भलीभांति अध्ययन कर ज्ञानार्जन कर लाभ उठाया जा सकता है।

अण्डा में पाये जाने वाले तत्व

अण्डा विटामिन्स तथा मिनरल्स से पूर्णतया समृध्द है। अण्डा में विटामिन A, विटामिन B1, विटामिन B12, विटामिन D, प्रोटीन, विटामिन-E , विटामिन-K, फैटी एसिड, सल्फर, बायोटीन, सोड़ियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फोलिक एसिड, ल्यूटिन, पोटैशियम, फास्फोरस, आयरन, ओमेगा-3 पैटी एसिड, राइबोफ्लेविन, निकोटेनिक अम्ल आदि तत्व एवं विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। अण्डा के सफेद भाग में प्रोटीन अधिक मात्रा में पायी जाती है तथा कोलेस्ट्राल नही पाया जाता है। अण्डा के पीले भाग (जर्दी) में कोलेस्ट्राल विटामिन्स तथा अन्य पोषक तत्व पाये जाते हैं। अण्डे में एंटीआक्सीडेन्ट का गुण भी पाया जाता है।

अच्छे अण्डे की पहचान

अण्डे को पानी में डालने पर यदि वह पूरी तरह डूब जाता है अर्थात् बर्तन की सतह पर पहुंच जाता है तो अण्डा पूरी तरह से अच्छा है यानी स्वस्थ है। यदि पानी में थोड़ा सा डूबकर पानी की सतह पर ही रहता है तो अण्डा पुराना हैं अर्थात कम अच्छा है। यदि अण्डे को तोड़ने पर उसकी जर्दी का रंग अपने वास्तविक रंग में नही है अर्थात् पीला नही है, बदल गया है तो अण्डा खराब हो गया है। यदि अण्डा क्रेक हो गया है तो उसमें बैक्टीरिया का संक्रमण हो सकता है। हमेशा अच्छे अण्डे का ही सेवन करना चाहिए।

अण्डा सेवन की मात्रा

एक वयस्क स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन एक से दो अण्डे का सेवन कर सकता है। अवयस्क बच्चे तथा बुजुर्ग प्रतिदिन एक अण्डे का सेवन कर सकते हैं। जो व्यक्ति प्रोटीन चाहते हैं, कोलेस्ट्राल नही चाहते हैं उन्हें अण्डे के सफेद भाग का ही सेवन करना चाहिए, पीले भाग का सेवन नही करना चाहिए। जो व्यक्ति मसल्स बनाना चाहते हैं उन्हे अण्डा के सफेद व पीले दोनों भागों का सेवन करना चाहिए। अण्डे का सेवन लगातार बहुत अधिक समय तक नही करना चाहिए। एक माह तक लगातार अण्डे का सेवन किये जाने के बाद एक सप्ताह तक अण्डे का सेवन बन्द देना चाहिए इसके बाद पुनः अण्डे का नियमित सेवन कर सकते हैं। ऐसा करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। गर्मी के मौसम में अण्डे के पीले भाग का कम से कम सेवन करना चाहिए।

अण्डा पकाने की विधि

अण्डे को मध्यम आंच में उबलते हुए पानी में 8-10 मिनट तक उबालना चाहिए। इससे अण्डा अच्छी तरह पक जाता है तथा सभी विटामिन्स व पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। बहुत अधिक उबालने से अण्डे में पाया जाने वाला विटामिन-ए  करीब 20 प्रतिशत नष्ट हो जाता है। अण्डे को फ्राई करने पर उसमें फैट तथा कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ जाती है।

अण्डा स्टोर करने की विधि

स्वस्थ अण्डे को किसी ढंके हुए बर्तन में रख कर फ्रिज में सुरक्षित ऱख सकते हैं। फ्रोजेन रूप में अण्डे को ढाई से तीन माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सामान्यतया मुर्गी द्वारा अण्डा देने की तिथि से 28 दिन तक अण्डा खाने योग्य रहता है। 28 दिन से अधिक पुराने अण्डे का सेवन नही करना चाहिए।

अण्डा खाने के स्वास्थ्य लाभ

मस्तिष्क स्वस्थ हो जाता हैः अण्डे का नियमित रूप से सेवन करने से अण्डे में पाया जाने वाला विटामिन-बी तथा कोलीन सेल मेम्ब्रेन को बढ़ा देता है जिससे मस्तिष्क स्वस्थ हो जाता है।

आंखों को स्वस्थ रखता हैः विटामिन-A की कमी से आंखों में नाना प्रकार के रोग हो जाते हैं। अण्डे का नियमित सेवन करने से आंखें स्वस्थ हो जाती है, मोतियाबिन्द तथा अन्य बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

वजन कम हो जाता हैः अण्डे के सफेद भाग का नियमित सेवन करने से शरीर का वजन नही बढ़ता है, यदि वजन बढ़ा हुआ हैं तो कम हो जाता है। जिनका वजन बढ़ा हुआ हो, उन्हें अण्डे के पीले भाग का सेवन नही करना चाहिए। अण्डे के पीले भाग का सेवन करने से इसमें पाया जाने कोलेस्ट्राल वजन तथा मोटापा बढ़ा देता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती हैः अण्डे का नियमित सेवन करने से इसमें पाया जाने वाला विटामिन-ए तथा एंटी-आक्सीडेन्ट गुण मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है।

हृदय की बीमारियों का जोखिम कम हो जाता हैः अण्डे के सफेद भाग का नियमित सेवन करने से करने से इसमें पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड रक्त में ग्लिसराइड का मात्रा को कम कर देता है जिसके कारण हृयाघात, स्ट्रोक आदि बीमारियों का जोखिम कम हो जाता है।

अण्डा खाने से हानि

अण्डे का अधिक सेवन करने से इसकी जर्दी में पाया जाने वाला कोलेस्ट्राल शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा को बढ़ा देता है, शरीर में मोटापा आ जाता है तथा वजन बढ़ जाता है। इसलिए अण्डे की जर्दी का अधिक सेवन नही करना चाहिए। अण्डे के सेवन से एलर्जी हो सकती है। जिन्हें एलर्जी की शिकायत हो उन्हें अण्डे का सेवन नही करना चाहिए। अण्डे के साथ दूध का सेवन नही करना चाहिए। अण्डा खाने के दो घण्टे बाद दूध का सेवन किया जा सकता है।

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