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पेट की चर्वी को कम कैसे करें

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पेट की चर्वी को कम कैसे करें

आजकल के बदलते परिवेश में शरीर में पेट की चर्वी बढ़ना तथा मोटापा आम बात हो गई जो मुख्यतया असन्तुलित आहार, अनियमित दिनचर्या, वसायुक्त भोजन का अधिक सेवन, आवश्यकता से अधिक कैलोरीयुक्त भोजन लेना, अनियमित रहन-सहन, तनाव, अनिद्रा तथा लग्जरी सुस्त लाइफ स्टाइल आदि से शरीर में वात, पित्त व कफ का असन्तुलन हो जाने के कारण होता है। शरीर में चर्वी तथा मोटापा अधिक बढ़ जाने से शरीर की स्मार्टनेस कम हो जाती है, नाना प्रकार की बीमारियां जैसे- शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक आदि का जोखिम बढ़ जाता है। एक बार शरीर में चर्वी जम जाने से उसे खत्म करना काफी कठिन हो जाता है। मार्केट में चर्वी कम करने की तमाम दवाएं बिकती हैं जिनका लम्बे समय तक सेवन करने से चर्वी कम हो भी जाये तो दवाओं का साइड इफेक्ट होने के कारण कोई न कोई दूसरी बीमारी जन्म ले लेती है तथा दवा का सेवन बन्द करने के कुछ समय बाद पुनः चर्वी जमा हो जाती है। प्रस्तुत लेख में पेट की चर्वी कम करने के कुछ विशिष्ट उपाय प्रकाशित किये जा रहे हैं जिसका भलीभांति अध्ययन कर के ज्ञानार्जन कर जीवन शैली में नियमित रूप से अपनाकर निःसन्देह पेट की चर्वी कम की जा सकती है।
1. पर्याप्त मात्रा में पानी पियेः पर्याप्त मात्रा में कम से कम एक दिन में 10 से 11 गिलास पानी का सेवन किया जाय इससे कम भोजन की आवश्यकता पड़ती है, जिसके कारण मेटाबालिज्म बढ़ता है तथा भोजन के सापेक्ष अधिक कैलोरी ऊर्जा बर्न होती है जिसके फलस्वरूप पेट की चर्वी कम होती है।
2.  नियमित योगासन किया जायः पेट की चर्वी घटाने वाले योगासनों पश्चिमोत्तानासन, अर्ध्दमत्स्येन्द्रासन, नौकासन तथा पादहस्तासन का नित्य प्रति खाली पेट अभ्यास किया जाय। ऐसा नियमित रूप से करने से पेट की चर्वी तेजी से कम होती है।
3.  भोजन में फाइबरयुक्त आहार का अधिकाधिक सेवन किया जायः फाइबर वसा को कम करता है इसलिए भोजन में अधिकांश मात्रा में फाइबरयुक्त आहार जैसे- गाजर, बीन्स आदि का सेवन किया जाय। भोजन का एक तिहाई भाग कच्ची सलाद सेवन किया जाय। भोजन के 30-35 मिनट पूर्व आहार में गाजर, बीन्स, मूली, नीबू आदि का पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाय। भोजन में वसायुक्त आहार का कम से कम प्रयोग किया जाय। सप्ताह में कम से कम एक दिन वसायुक्त आहार का सेवन बिलकुल न किया जाय। मीठे खाद्य पदार्थों का कम से कम सेवन किया जाय। स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों जैसे चावल, मैदा, पास्ता, ब्रेड आदि का सेवन न किया जाय। नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल न किया जाय। ऐसा नियमित रूप से करने से पाचन तन्त्र मजबूत होता है तथा पेट की चर्बी तेजी से कम होती है।
4. ग्रीन टी का नियमित सेवन किया जायः ग्रीन टी का सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से इसमें पाये जाने वालें एंटीआक्सीडेन्ट गुण के कारण पेट की चर्बी तेजी से कम होती है।
5. अजवाइन का नियमित सेवन किया जायः अजवाइन को भोजन तथा सलाद में सम्मिलित करें। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन भिगों दें, सुबह खाली पेट उक्त पानी का नियमित सेवन करें। ऐसा करने से पेट की चर्वी कम होती है।
6. नियमित प्राणायाम किया जायः नित्यप्रति सुबह खाली पेट प्राणायाम महाबन्ध, शीतली प्राणायाम, कपालभांति प्राणायाम तथा भस्त्रिका प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से पेट की चर्वी तेजी से कम होती है।
7. साप्ताहिक उपवास किया जायः सप्ताह में कम से कम एक दिन उपवास किया जाय। इससे डायटिंग होने से मेटाबालिज्म बढ़ता है तथा पेट की चर्वी कम होती है।
8. भोजन थोड़ा-थोड़ा करेः जो भोजन दो बार में सेवन करते हैं, उसे थोड़ा-थोड़ा करके चार बार में सेवन करें। ऐसा करने से भूख भी नही लगती तथा धीरे-धीरे उत्पन्न ऊर्जा बर्न होती रहती है तथा फैट नही बढ़ेता है।
9. शहद तथा नीबू मिश्रित गर्म जल का सेवन किया जायः नीबू, शहद तथा गर्म जल तीनों ही चर्वी कम करते हैं। सुबह खाली पेट स्वादानुसार शहद तथा नीबू मिश्रित दो से तीन गिलास गर्म जल का नियमित सेवन किया जाय। जिन्हे मधुमेह की शिकायत हो उन्हे शहद का सेवन नही करना चाहिए। उन्हें नीबू मिश्रित गर्म जल का ही सेवन करना चाहिए। रात को सोते समय भी एक गिलास नीबू मिश्रित गर्म जल का सेवन किया जाय। ऐसा करने से पेट की चर्वी तेजी से कम होती है।
10. प्रतिदिन मार्निंग वाक किया जायः प्रतिदिन सुबह उठकर नित्यक्रिया से निवृत्त होकर मार्निंग वाक किया जाय, साइक्लिंग किया जाय, दौड़ लगाई जाय। ऐसा करने से मेटाबालिज्म बढ़ जाता है जिससे सम्पूर्ण भोजन आसानी से डायजेस्ट होकर ऊर्जा बन जाती तथा चर्वी बनने के बजाय चर्वी कम होने लगती है।
11 .डिनर के दो घण्टे बाद ही सोयेः सोने के दो घण्टे पहले डिनर किया जाय। डिनर के बाद कुछ समय अवश्य टहलें, 7 से  8 घण्टे की पर्याप्त नीद लें। ऐसा नियमित रूप से करने से पेट की चर्वी कम होती है।
12. तनाव न लिया जायः  तनाव होने पर रक्त में कार्टिसोल बढ़ जाता है जिससे मेटाबालिज्म बढ़ता है तथा शरीर में चर्वी बढ़ जाती है। इसलिए तनाव बिल्कुल न लिया जाय।

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