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औषधीय गुणों की खान करैला

औषधीय गुणों की खान करैला

करेला एक कड़वे स्वाद वाली सब्जी है जो पूरे भारत में पाई जाती है जो कि तमाम औषधीय गुणों से युक्त है। करैला का वानस्पतिक नाम मिमोर्डिका करेंशिया है। करैले का जन्म स्थान अफ्रीका तथा चीन को माना जाता है। यहीं से ही इसका प्रसार  संसार के अन्य भागों में हुआ। वर्तमान में करैला की खेती विश्व के कई देशों में की जाती है। वर्तमान में करैले की खेती सम्पूर्ण भारत में की जाती है। करैला पित्तनाशक, पाचक, क्षुधावर्धक, ज्वरनाशक, रूधिरविकार नाशक, कफ विकारनाशक, कृमिनाशक, वात विकार नाशक, पाण्डु, प्रमेह नाशक, एण्टीआक्सीडेण्ट, शीतल, हल्का तथा स्वाद में कड़वा  हैं। करैला वातरक्त, यकृत वृध्दि, प्लीहा वृध्दि, आमवात एवं पुराने त्वचा रोगों आदि में अत्यन्त लाभदायक है।

करैला का वानस्पतिक नाम क्या है?

करैला का वानस्पतिक नाम मिमोर्डिका करेंशिया है।

करैला में कौन-कौन से तत्व पाये जाते है?

करैले में बहुत से तत्व, विटामिन्स तथा एण्टीआक्सीडेण्ट पाये जाते हैं। करैला में बीटाकैरोटीन, जिंक, आइरन, फास्फोरस, लूटीन, मैंगनीज, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैरोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-बी एवं विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं।

करैला का सेवन कैसे किया जाता है?

करैला को सब्जी बनाकर खाया जाता है, जूस बनाकर सेवन किया जाता है तथा अंचार बनाकर खाया जाता है। करैले के फल तथा फलों के रस को दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। पके करैले के बीजों का प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है।

 करैले का जूस कैसे बनाते हैं?

करैले का जूस निम्न प्रक्रिया से बनाया जाता हैः-

  • सबसे पहले दो हरे ताजे करेले लें और उन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।
  • करेले को चाकू से छोटे छोटे टुकड़े कर लीजिये, इसके बीज निकाल कर जूसर में रख लीजिये.
  • जार में एक से दो चम्मच साफ पानी डालें।
  • एक चुटकी या आवश्यकतानुसार काला नमक डालें।
  • एक हरा आंवला बीज निकाल कर डाल दीजिये.
  • अगर हरा आंवला न मिले तो एक चौथाई चम्मच आंवला पाउडर मिला लें।
  • अगर आंवला पाउडर भी न हो तो उसकी जगह आधा चम्मच नींबू का रस मिलाएं।
  • दो पिसी हुई काली मिर्च डालें।
  • अब जूसर को तब तक चलाएं जब तक एक पेस्ट न बन जाए।
  • पास्ता को छलनी में डालिये और चम्मच से दबा कर छान लीजिये. आपका करेले का जूस तैयार है.
  • अगर आपके पास जूसर नहीं है या किसी कारण से बिजली नहीं है और बिजली का कोई स्रोत नहीं है, तो आप दो हरे ताजे करेले ले सकते हैं, उन्हें अच्छी तरह से धो लें और चाकू की मदद से उनके बीज निकाल लें। करेले को किसी बर्तन में कद्दूकस कर लीजिये, एक गिलास पानी डालिये, इस मिश्रण को 30 से 40 मिनिट के लिये रख दीजिये. इसके बाद रस को छलनी या साफ कपड़े से छान लें और उसमें चुटकी भर काला नमक, एक पिसे हुए आंवले का रस या आधा चम्मच नींबू का रस और दो पिसी हुई काली मिर्च मिलाएं। आपका करेले का जूस तैयार है.

करैले के फल तथा फलों के रस को दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। करेले के जूस का नियमित सेवन मानव शरीर को कई बीमारियों से बचाता है। करैला के कुछ विशिष्ट औषधीय स्वास्थ्य लाभ निम्नवत हैः-

1. वजन कम करता है

जो लोग वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं उनके लिए करेले के जूस का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। वसायुक्त चीजों का सेवन बंद करके करेले का रस सुबह खाली पेट दो से तीन सप्ताह तक लगातार पीने से शरीर में जमा अनावश्यक चर्बी कम होती है और शरीर का वजन कम होता है। इस बात का ध्यान रखें कि करेले का जूस पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं।

2. भूख बढ़ाता है

अमीर चीजों का सेवन बंद करने के बाद करेले के रस का नियमित रूप से दो से तीन सप्ताह तक सेवन करने से व्यक्ति की पाचन क्रिया बेहतर होती है और भूख बढ़ती है। इस बात का ध्यान रखें कि करेले का जूस पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं।

3. खांसी से राहत देता है

कफ बनाने वाले पदार्थों का सेवन बंद करने के बाद तीन से चार सप्ताह तक करेले के रस का नियमित सेवन करने से करेले में पाया जाने वाला फास्फोरस नामक तत्व शरीर में पुराने कफ की समस्या को दूर करता है और खांसी का रोग दूर होता है। इस बात का ध्यान रखें कि करेले का जूस पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं।

4. मधुमेह नियंत्रित होता है

25 मिलीलीटर करेले के रस में 25 मिलीलीटर गाजर का रस मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से सेवन करने से करेले में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट (चरित्र और मोमेरसिडिन तत्व) धीरे-धीरे पहले से बढ़े हुए शुगर लेबल को कम करते हैं और मधुमेह को नियंत्रित करते हैं। ऐसा होता है। इस बात का ध्यान रखें कि करेले का जूस पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं।

5. पथरी रोग को ठीक करता है

पथरी रोग से पीड़ित लोगों के लिए करेले का रस अमृत के समान है। करेले के 25 मिलीलीटर रस में 5 मिलीलीटर शुद्ध शहद मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट पीने से पथरी धीरे-धीरे पिघलकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकल जाती है और पथरी रोग ठीक हो जाता है। इस बात का ध्यान रखें कि करेले का जूस पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं।

6. मोटापा दूर करता है

25 मिलीलीटर करेले के रस में 5 मिलीलीटर नींबू का रस मिलाकर नियमित रूप से सुबह खाली पेट लेने से लगभग दो महीने में चर्बी कम होती है और मोटापा समाप्त होता है। विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

7. अतिसार के रोग में अत्यंत लाभकारी

दस्त (उल्टी, दस्त की समस्या) होने पर करेले के रस में काला नमक मिलाकर सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है और रोगी ठीक हो जाता है।

8. जलोदर रोग में बहुत लाभकारी है

गरिष्ठ चीजों का सेवन बंद कर दो चम्मच करेले का रस आधा कप पानी में मिलाकर नियमित रूप से दिन में तीन से चार बार सेवन करने से जलोदर रोग या लीवर बढ़ने की समस्या दूर हो जाती है।

9. खूनी बवासीर रोग में बहुत लाभदायक होता है

खूनी बवासीर के रोगियों के लिए करेले का रस अमृत के समान है। भारी चीजें लेना बंद कर दें और 5 मिलीलीटर करेले के रस में आधा चम्मच चीनी मिलाकर नियमित रूप से सुबह-शाम चार से पांच सप्ताह तक सेवन करने से रक्तस्राव बंद हो जाता है। गठिया रोग में करेले के रस को प्रभावित स्थान पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में बहुत लाभ मिलता है।

10. चर्म रोगों में अत्यंत लाभकारी है

करेले के जूस का नियमित सेवन करने से करेले में पाए जाने वाले अल्कलॉइड और बिटर खून को शुद्ध करते हैं। भारी चीजों का सेवन बंद करने के बाद 20 मिलीलीटर करेले के रस में 5 मिलीलीटर नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से लेने से त्वचा रोगों (दाद, खुजली, खुजली, साइनसाइटिस, मुंहासे आदि) में बहुत लाभ मिलता है। .

11. गैस, कब्ज और एसिडिटी की समस्या से छुटकारा दिलाता है

भारी चीजों का सेवन बंद कर दें और आधा कप करेले के रस में एक चौथाई कप गुनगुने पानी और एक चम्मच पिसे हुए आंवले के चूर्ण को दिन में तीन बार (जितना हो सके खाली पेट) मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें, समस्या गैस, कब्ज और एसिडिटी से। चला जाता है।

12. गठिया व जोड़ों के दर्द से राहत देता है

करैला तथा तिल के तेल को बराबर मात्रा में लेकर प्रभावित स्थान पर मालिश करने से गठिया तथा जोड़ों के दर्द में काफी लाभ होता है।

13. उल्टी दस्त में अत्यन्त लाभदायक है

करैला को तीन से चार बीज तथा तीन से चार काली मिर्च को सिलबट्टा पर घिस कर पानी में मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से उल्टी दस्त बन्द हो जाते हैं।

14. मुख के छाले ठीक हो जाते हैं

करैले के रस का दिन में दो से तीन बार कुल्ला करने से मुख के छाले ठीक हो जाते हैं।

15. कृमिनाशक है

एक गिलास छाछ  में एक चम्मच करैले का रस मिलाकर दिन में दो बार पीने से पेट को कीड़े (कृमि) नष्ट हो जाते हैं। यह पेट के कीड़ों को नष्ट करने की अचूक दवा है।

16. पीलिया रोग नाशक है

पीलिया रोग होने पर दिन में दो बार करैले का रस पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।

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