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Depression in Hindi

Depression (in Hindi)

डिप्रेशन क्या है?

डिप्रेशन अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसे हिन्दी में “अवसाद” या “मानसिक अवसाद” कहा जाता है। व्यक्ति के मन (मस्तिष्क) की एक ऐसी अवस्था जिसमें व्यक्ति का मन किसी कारणवश तनाव, चिन्ता, उदासी तथा निगेटिविटी (नकारात्मक भाव) से घिर जाता है, “डिप्रेशन” कहलाता है। डिप्रेशन मनुष्य के मन से जुड़ा हुआ एक ऐसा मानसिक रोग है जिसका समय से तथा समुचित इलाज न कराये जाने पर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, सोचने समझने की क्षमता धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है, व्यक्ति कुंठा का शिकार हो जाता है, पर्सनालिटी डिसआर्डर का शिकार हो जाता है, उसकी सकारात्मक सोच समाप्त हो जाती है तथा उसके मन में नकारात्मक सोच समा जाती है, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार दिखायी देता है, जीवन हताशा व निराशा से भर जाता है और व्यक्ति (रोगी) को पुनः अपनी सामान्य अवस्था में लौट पाना अत्यन्त कठिन हो जाता है।

मनोविज्ञान के अनुसार- डिप्रेशन (अवसाद) एक ऐसा रोग है जिसका सम्बन्ध व्यक्ति के मन की भावनाओं से जुड़े कष्टों (दुखों) से होता है। डिप्रेशन (अवसाद) का सम्बन्ध किसी व्यक्ति के असफल प्रेम से हो सकता है। किसी वस्तु या सम्पत्ति को पाने की लालसा में भी डिप्रेशन हो सकता है। जब असफल प्रेम सम्बन्धों के कारण डिप्रेशन होता है तो अधिकांश प्रकरणों में डिप्रेशन की स्थिति अत्यन्त ही गम्भीर हो जाती है जिसमें मरीज अपने साथी के वियोग में पागल सा हो जाता है, वह अपने को संसार में अकेला, असहाय तथा दीनहीन समझने लगता है, मन में ऐसे नकारात्मक भाव आते हैं कि वह जीवन में कोई रूचि नही रखता, लोग हंसते हैं तो उसे लगता है कि उसे ही देख कर हंस रहें है, इतना ही नही हत्या एवं आत्महत्या के भाव भी मन में आने लगते हैं। डिप्रेशन की यह स्थिति अत्यन्त भयानक होती है।

डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण मनुष्य के शरीर में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह तथा अन्य शारीरिक व मानसिक बीमारियां हो जाती हैं और अस्थमा, कैंसर, आर्थ्राइटिस, मोटापा व कार्डियोवेस्क्यूलर बीमारियों पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

डिप्रेशन एक ऐसी गम्भीर बीमारी है जिसमें व्यक्ति का सम्पूर्ण अमन चैन नष्ट हो जाता है, दैनिक गतिविधियां बुरी तरह से प्रभावित हो जाती हैं। इस बीमारी का यदि समय से तथा समुचित उपचार न कराया जाये तो अत्यन्त घातक हो सकती है तथा यदि समय से व समुचित उपचार कराया जाये तो तीन से चार सप्ताह में ही धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है अर्थात् सुधार होने लगता है।

डिप्रेशन की उत्पत्ति कैसे होती है?

डिप्रेशन (अवसाद) की उत्पत्ति स्ट्रेस (तनाव) से होती है। अल्प मात्रा में तनाव किसी न किसी बात को लेकर लगभग प्रत्येक व्यक्ति में पाया जाता है जो कि कहीं-कही पर तो फायदेमन्द भी होता है। यदि व्यक्ति किसी कार्य को थोड़े तनाव में करता है तो वह उस कार्य को बहुत अच्छी तरह से कर लेता है जिससे उसे मानसिक सन्तुष्टि तथा अपनों का मान सम्मान भी मिलता है और कार्य पूर्ण होने के बाद यह तनाव समाप्त हो जाता है। यह तनाव किसी कार्य को लेकर क्षणिक होता है। जब यही तनाव लगातार बना रहता है तो धीरे-धीरे अनियन्त्रित हो जाता है, व्यक्ति की सकारात्मक सोच धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है, मस्तिष्क व शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है, किसी कार्य में मन नहीं लगता जिसके कारण किसी कार्य को कुशलतापूर्वक नही कर पाता, हमेशा तनाव में रहता है तब तनाव डिप्रेशन में बदल जाता है।

डिप्रेशन के मरीज की पहचान कैसे की जाती है?

डिप्रेशन एक ऐसाी बीमारी है जिसमें मरीज को देखकर यह पता नही लगाया जा सकता है कि वह डिप्रेशन का मरीज है। मात्र लक्षणों के आधार पर ही डिप्रेशन के मरीज की पहचान की जा सकती है।

क्या डिप्रेशन की बीमारी लाइलाज है?

डिप्रेशन की बीमारी लाइलाज नही है। इस बीमारी का यदि समय से तथा समुचित उपचार कराया जाये तो तीन से चार सप्ताह में ही धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है। इसका इलाज लम्बा चलता है। मरीज ठीक हो जाता है।

डिप्रेशन की बीमारी किन्हें हो सकती है?

डिप्रेशन की बीमारी किशोर, वयस्क या वृध्द किसी भी ऐसे व्यक्ति को हो सकती है जो किसी कारणवश लम्बे समय तक लगातार तनाव में रहता हो। वर्तमान समय में किशोर भी इस बीमारी से बहुत अधिक ग्रसित हो रहे है जिसका मुख्य कारण शिक्षा व रोजगार का बढ़ता दबाव, माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव, अकेलापन महसूस होना, पारिवारिक तथा रिलेशनशिप की समस्याएं आदि हो सकते हैं। वर्तमान समय में भारत में किशोरों में डिप्रेशन की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सम्पूर्ण विश्व में करीब 264 मिलियन से अधिक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं। डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में निरन्तर बढ़ोत्तरी हो रही है जो कि सम्पूर्ण विश्व से लिए चुनौती बन चुकी है।

डिप्रेशन होने पर क्या करें?

डिप्रेशन को हल्के में न लें। लापरवाही बरतनें पर डिप्रेशन की स्थिति अत्यन्त घातक हो सकती है। डिप्रेशन होने पर बिना बिलम्ब किये तत्काल किसी योग्य चिकित्सक (मानसिक रोग विशेषज्ञ) से सम्पर्क कर परामर्श कर नियमित उपचार करायें तथा चिकित्सक द्वारा दिये गये निर्देशों का पूर्णतया पालन करें। नकारात्मक सोच से उबरने का प्रयास करें। नकारात्मक लोगों के सम्पर्क में न आयें। सकारात्मक सोच लायें। सन्तुलित व सुपाच्य आहार लें। कम से कम 8 से 9 घण्टे गहरी नींद सोयें। योग तथा प्राणायाम करें। मार्निंग वाक करें। ईश्वर में आस्था रखें।

मुझे उम्मीद है कि यह आर्टिकल आप को पसन्द आया होगा। अगले आर्टिकल में डिप्रेशन होने के कारण तथा लक्षणों को प्रकाशित किया जायेगा।

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