Health

Diagnosis of Thyroid disease in Hindi

Diagnosis of Thyroid disease in Hindi (थायराइड रोग का निदान)

मनुष्य में थायराइड रोग दो प्रकार का होता हैः हाइपोथायराइडिज्म रोग तथा हाइपरथायराइडिज्म रोग। मनुष्य में थायराइड नामक गंभीर बीमारी होने का सबसे मुख्य कारण आयोडीन का कम या अधिक हो जाना है। शरीर में आयोडीन कम हो जाने पर हाइपोथायराइडिज्म रोग हो जाता है। शरीर में आयोडीन अधिक हो जाने हाइपरथायराइडिज्म रोग हो जाता है। डोपामाइन, स्टेरायड, या ओपिओइक दर्द निवारक दवाओं (जैसे-मार्फीन) का अधिक सेवन करने भी हाइपरथायराइडिज्म रोग हो सकता है। यदि मरीज स्टेरॉयड, डोपामाइन, या ओपिओइड दर्द निवारक (जैसे मॉर्फिन ) दवाओं का सेवन कर रहा है तो जांच में टीएसएच का सामान्य से कम स्तर आ सकता है।

इलाजकर्ता चिकित्सक द्वारा सर्वप्रथम मरीज का शारीरिक परीक्षण किया जाता है जिसमें थायराइड की वृध्दि के लिए मरीज की गर्दन / प्रभावित अंग का बारीकी से निरीक्षण किया जाता है तथा बीमारी के सम्बन्ध में मरीज से पूंछतांछ की जाती है। तत्पश्चात् थायराइड फंक्शन की जांच के लिए निम्नांकित टेस्ट कराए जाते हैंः-

  • रक्त परीक्षण।
  • इमेजिंग परीक्षण।

रक्त परीक्षण

रक्त परीक्षण के माध्यम से सामान्यतया निम्नांकित तीन टेस्ट किये जाते हैं-

  • T.S.H. टेस्ट।
  • T3 टेस्ट।
  • T4 टेस्ट।

T.S.H. टेस्ट

T.S.H. एक थायराइड उत्तेजक हार्मोन है जिसका उत्पादन पिट्यूटरी ग्रन्थि करती है। यह हार्मोन थायराइड ग्रन्थि को थायराइड हार्मोन T3 व T4 उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करता है। थायराइड ग्रन्थि T3 व T4 उत्पन्न करती है। जब किसी कारण से थायराइड ग्रन्थि कम मात्रा में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का उत्पादन करने लगती है तब पिट्यूटरी ग्रन्थि अधिक मात्रा में T.S.H. हार्मोन उत्पन्न करके थायराइड ग्रन्थि को थायराइड हार्मोंन T3 व T4 उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित / उत्प्रेरित करती है। इस प्रकार पिट्यूटरी ग्रन्थि द्वारा अधिक मात्रा में T.S.H. हार्मोन उत्पन्न करने के कारण T.S.H. हार्मोन बढ़ जाता है।

थायराइड ग्रन्थि द्वारा कम मात्रा में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का उत्पादन करने पर शरीर में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 की कमी हो जाती है तथा हाइपोथायराइडिज्म हो जाता है। हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल कम हो जाता है तथा T.S.H. का लेबल बढ़ जाता है।

थायराइड रोग में चिकित्सक द्वारा पहले थायराइड हार्मोंन T3 व T4  का टेस्ट कराया जाता है। टेस्ट परिणाम में जब थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल सामान्य से कम या अधिक पाया जाता है, तब चिकित्सक द्वारा T.S.H. टेस्ट कराया जाता है।

थायराइड हार्मोंन T3 व T4  का टेस्ट कराने पर टेस्ट परिणाम में जब थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल सामान्य से कम पाया जाता है तब हाइपोथायराइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है। हाइपोथायराइडिज्म रोग में T.S.H. लेबल बढ़ जाता है।

इस प्रकार हाइपोथायराइडिज्म रोग में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल सामान्य से कम तथा T.S.H. हार्मोन का लेबल सामान्य से अधिक होता है।

थायराइड हार्मोंन T3 व T4  का टेस्ट कराने पर टेस्ट परिणाम में जब थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल सामान्य से अधिक पाया जाता है तब हाइपरथायराइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है। हाइपरथायराइडिज्म रोग में T.S.H. लेबल घट जाता है।

इस प्रकार हाइपरथायराइडिज्म रोग में थायराइड हार्मोंन T3 व T4 का लेबल सामान्य से अधिक तथा T.S.H. का लेबल सामान्य से कम होता है।

गर्भावस्था के दौरान स्त्रियों में T.S.H. का सामान्य लेबल से अधिक हो सकता है। डोपामाइन, स्टेरायड, या ओपिओइक दर्द निवारक दवाओं (जैसे-मार्फीन) का अधिक सेवन करने T.S.H. का सामान्य लेबल से कम हो सकता है।

वयस्क व्यक्ति के लिए T.S.H. का सामान्य लेबल 0.40 mIU/mL से 4.50 mIU/mL होता है। यदि रक्त परीक्षण में T.S.H. का लेबल 0.40 mIU/mL से कम पाया जाता है तो हाइपरथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है। यदि रक्त परीक्षण में T.S.H. का लेबल 4.50 mIU/mL से अधिक पाया जाता है तो हाइपोथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक द्वारा रक्त परीक्षण से T3 व T4 हार्मोन का भी परीक्षण कराया जाता है। चिकित्सक द्वारा मरीज की स्थिति को देखते हुए तीनों टेस्ट (T.S.H. टेस्ट, T3 टेस्ट व T4 टेस्ट) एक साथ भी कराये जाते हैं।

T3 टेस्ट

यह टेस्ट रक्त परीक्षण द्वारा किया जाता है। यदि रक्त परीक्षण में T3 हार्मोन सामान्य से अधिक पाया जाता है तो हाइपरथायराइडिज्म रोग होने का संकेत मिलता है। यदि रक्त परीक्षण में T3 हार्मोन सामान्य से कम पाया जाता है तो हाइपोथायराइडिज्म रोग होने का संकेत मिलता है।

वयस्क व्यक्तियों में थायराइड हार्मोन T3 का सामान्य लेबल 100 ng/dL से 200 ng/dL होता है। यदि रक्त परीक्षण में T3 का लेबल 100 ng/dL  से कम पाया जाता है तो हाइपोथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है। यदि रक्त परीक्षण में T3 का लेबल 200 ng/dL से अधिक पाया जाता है तो हाइपरथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है।

T4 टेस्ट

यह टेस्ट भी रक्त परीक्षण द्वारा किया जाता है। यदि रक्त परीक्षण में T4 हार्मोन सामान्य से अधिक पाया जाता है तो हाइपरथायराइडिज्म रोग होने का संकेत मिलता है। यदि रक्त परीक्षण में T4 हार्मोन सामान्य से कम पाया जाता है तो हाइपोथायराइडिज्म रोग होने का संकेत मिलता है।

वयस्कों में थायराइड हार्मोन T4 का सामान्य लेबल 5.0 ug/dL से 11.0 ug/dL होता है। यदि यदि रक्त परीक्षण में T4 का लेबल 5.0 ug/dL से कम पाया जाता है तो हाइपोथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है। यदि रक्त परीक्षण में T4 का लेबल 11.0 ug/dL से अधिक पाया जाता है तो हाइपरथायराइडिज्म रोग होने संकेत मिलता है।

थायराइड रोग की सामान्य अवस्था में रक्त परीक्षण से ही डायग्नोसिस (निदान) हो जाता है।

यदि मरीज को आटोइम्यून थायराइड विकार का संकेत है तो हाइपोथायराइड के विकास का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में इलाजकर्ता चिकित्सक निम्नांकित परीक्षण भी करा सकता हैः-

  • थायराइड एण्टीबाडी परीक्षण।
  • कैल्सीटोनिन परीक्षण।
  • थायरोग्लोबुलिन एण्टीबाडी परीक्षण (टी0जी0 एण्टीबाडी परीक्षण)।

थायराइड एण्टीबाडी परीक्षण 

थायराइड एण्टीबाडी परीक्षण आटोइम्यून थायराइड की विभिन्न परिस्थितियाों की पहचान करने के लिए किया जाता है जिसमें थायरोग्लोबुलिन एण्टीबाडी परीक्षण (टी0 जी0 एण्टीबाडी परीक्षण), थायराइड रिसेप्टर एण्टीबाडी परीक्षण (टी0एस0आई0 परीक्षण), थायराइड ब्लाकिंग इम्यूनोग्लोबुलिन परीक्षण (टी0बी0आई0 परीक्षण) तथा  माइक्रोसोमेल एण्टीबाडी परीक्षण सम्मिलित होते हैं।

कैल्सीटोनिन परीक्षण

कैल्सीटोनिन परीक्षण थायराइड के दुर्लभ विकारों मेडुलरी थायराइड कैंसर एवं सी- सेल हाइपरप्लासिया का पता लगाने के लिए किया जाता है।

थायरोग्लोबुलिन एण्टीबाडी परीक्षण (टी0 जी0 एण्टीबाडी परीक्षण)

थायरोग्लोबुलिन एण्टीबाडी परीक्षण (टी0 जी0 एण्टीबाडी परीक्षण) का प्रयोग थायराइड की सूजन (थायराइसिस) का पता लगाने के लिए किया जाता है। चिकित्सक द्वारा इस परीक्षण का प्रयोग थायराइड कैंसर के उपचार की निगरानी करने के लिए भी किया जाता है।

इमेजिंग परीक्षण (थायराइड स्कैन)

इस परीक्षण में अल्ट्रासाउण्ड के माध्यम से थायराइड ग्रन्थि के बढ़े हुए आकार का पता लगाया जाता हैं। इस अल्ट्रासाउण्ड में करीब आधा घण्टे का समय लगता है।

थायरायड ग्रन्थि में गांठ होने या कैंसर रोग की संभावना होने पर चिकित्सक द्वारा बायोप्सी टेस्ट भी कराया जा सकता है।

नोट- यह लेख मात्र जानकारी उद्देश्यों के लिए है। इसे चिकित्सक की सलाह के रूप में न लिया जाये। अपनी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के लिए तत्काल अपने चिकित्सक से सम्पर्क कर परामर्श करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes

AdBlock Detected

Please Consider Supporting Us By Disabling Your AD Blocker