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अलसी बीज के फायदे और नुकसान

अलसी बीज के फायदे और नुकसान

अलसी का बीज एक ऐसा अनाज है जिसमें तमाम औषधीय गुण (एन्टी-आक्सीडेन्ट, एन्टी-फंगल, एन्टी-थोरोम्बिक, एन्टीट्यूमर तथा एन्टीहाइपरटेन्टिव) पाये जाते हैं। अलसी सम्पूर्ण भारत में पायी जाती है। अलसी का वैज्ञानिक नाम लाइनम यूसीटैटेनियम हैं। विभिन्न भाषाओ में अलसी को विभिन्न नामों से जाना व पुकारा जाता है। हिन्दी भाषा में अलसी या तीसी के नाम से जाना जाता है, अंग्रेजी भाषा में Flax seed के नाम से जाना जाता है, संस्कृत भाषा में अलसी, उमा, क्षुमा, मसरीना, नीलपुष्पी तथा क्षौमी नामों से जाना जाता है, कन्नड में सेमीअगासे तथा अगसीबीज के नाम से जाना जाता है, तमिल में अलसीविराई के नाम से जाना जाता है, बंगाली भाषा मे तिसी तथा असिना के नाम से जाना जाता है, पंजाबी भाषा में अलीश तथा मराठी भाषा में जवस के नाम से जाना जाता है। वैसे तो अलसी कई प्रकार की होती है परन्तु मुख्यतया दो प्रकार की होती है-भूरी अलसी तथा पीली या सुनहरी अलसी। यही अलसी का संक्षिप्त परिचय है।
अलसी बीज विटामिन्स तथा मिनरल्स की खान है जिसमें प्रोटीन,सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, फैटी एसिड, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, मैंगनीज, सेलेनियम, जिंक, तांबा, आयरन, अल्फालिनोलिक एसिड, फास्फोरस, फोलेट, नियासिन, थियामिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन-बी, विटामिन-सी, विटामिन-ई तथा विटामिन-के आदि पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। 100 ग्राम अलसी के बीज से 534 कैलोरी ऊर्जा मिलती है।
अलसी को कई प्रकार से खाया जाता है, इसके बीज खाये जाते हैं, बीजों का चूर्ण बना कर खाया जाता है, लड्डू बनाकर खाया जाता है तथा इसका तेल निकालकर भी सेवन किया जाता है। यदि अलसी के बीज खाना चाहते हैं तो उसे भून कर खाना अधिक लाभदायक हैं। प्रश्न उठता है कि अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए अलसी का सेवन किस समय किया जाय? जहां तक अलसी के सेवन के समय प्रश्न है अलसी को जब चाहें तभी खा सकते हैं परन्तु ब्रेकफास्ट के साथ इसका सेवन अति उत्तम होता है। उल्लेखनीय है कि अलसी के बीजों की तासीर गर्म होती है, डिप्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, डायरिया, एलर्जी से पीड़ित लोग तथा खून पतला करने की दवा ले रहे लोगों को अलसी का सेवन नही करना चाहिए। अलसी का बीज जहां गुणों की खान है, इसके सेवन से कई लाभ होते हैं, वहीं पर इसके अधिक सेवन करने से कुछ नुकसान भी है। प्रस्तुत लेख में अलसी के सेवन से होने वाले कुछ विशिष्ट लाभ तथा नुकसान के सम्बन्ध में बताया जा रहा है। इस लेख का समुचित अध्ययन करके जानकारी हासिल कर अलसी के गुणों का भरपूर लाभ उठाया जा सकता है।

अलसी बीज के सेवन से फायदेः

  1. हृदय को स्वस्थ रखती हैः प्रतिदिन ब्रेकफास्ट के साथ दो चम्मच अलसी के चूर्ण का सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला लेगनन काम्पलेक्स हृदय की नसों में ब्लाकेज नही होने देता जिससे हृदयाघात का जोखिम कम हो जाता है तथा हृदय स्वस्थ रहता है।
  2. हाई ब्लड प्रेशर में अत्यन्त लाभकारी हैः प्रतिदिन ब्रेकफास्ट के साथ दो चम्मच अलसी के चूर्ण का सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड तथा फाइबर हाई ब्लड प्रेशर को कम कर के नियन्त्रित कर देता है।
  3. कोलेस्ट्राल नियन्त्रित करता हैः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला फाइबर बैड कोलेस्ट्राल को कम करके कोलेस्ट्राल को नियन्त्रित कर देता है।
  4. वजन कम हो जाता हैः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला फाइबर शरीर की अनावश्यक चर्वी को कम करके कम  करने में मदद करता है।
  5. लीवर को स्वस्थ रखती हैः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से लीवर में फैटी लीवर की समस्या नही होती। यदि फैटी लीवर की समस्या है तो ठीक हो जाती है।
  6. डायबिटीज नियन्त्रित हो जाता हैः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला फाइबर तथा एन्टीडायबेटिक गुण इन्सुलिन को नियन्त्रित करके धीरे-धीरे डायबिटीज को नियन्त्रित कर देता है।
  7. गैस्ट्राइसिस रोग में अत्यन्त लाभकारी हैः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से अलसी में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड धीरे-धीरे गैस्ट्राइसिस रोग को ठीक कर देता है।
  8. अस्थमा तथा खांसी रोग में अत्यन्त लाभदायक हैः तीन ग्राम अलसी चूर्ण ढाई सौ ग्राम उबले पानी में डालकर रखें, एक घण्टे बाद पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह-शाम नियामित रूप से सेवन करने से अलसी में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड अस्थमा रोग के प्रभाव कम देता है तथा सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
  9. कैंसर के जोखिम को कम कर देता हैः अलसी चूर्ण का नियमित रूप से सेवन करने से ब्रेस्ट कैंसर तथा गर्भाशय कैंसर का जोखिम कम हो जाता है।
  10. कब्ज रोग ठीक हो जाता हैः अलसी चूर्ण का नियमित रूप से सेवन करने से इसमें पाया जाने वाला फाइबर धीरे-धीरे कब्ज को ठीक कर देता है।
  11. बालों को स्वस्थ रखता हैः अलसी के तेल को सिर तथा बालों में अच्छी तरह से लगाकर 5 से 10 मिनट तक हल्के हाथों से धीरे-धीरे मसाज करें, दो-तीन घण्टे बाद ठण्डे पानी तथा शैम्पू से धोकर बाल को छाया में सुखा लें। यह प्रयोग प्रत्येक तीसरे दिन करते हुए नियमित रूप से तीन से चार सप्ताह तक करने से बालों का डैंड्रफ नष्ट हो जाता है, बाल झड़ना बन्द हो जाते है तथा बाल मोटे, मुलायम, घने, लम्बे व स्वस्थ हो जाते है।
  12. अन्य लाभः अलसी का नियमित रूप से सेवन करने से गले की खराश ठीक हो जाती है, पाचन तन्त्र स्वस्थ हो जाता है। काली मिर्च तथा शहद के साथ अलसी का नियमित रूप से सेवन बल, वीर्य तथा स्टेमिना में वृध्दि करता है। अलसी के तेल में ईसबगोल को पीस कर लगाने से गठिया तथा जोड़ों के दर्द में काफी लाभ होता है।

अलसी बीज के अधिक सेवन से नुकसानः

अलसी के बीज का अधिक मात्रा में सेवन करने से डायरिया हो सकता है। कब्ज हो सकता है। आंतो में ब्लाकेज हो सकता है। एलर्जी हो सकती है। महिलाओं के पीरिएड चक्र में बदलाव हो सकता है।

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