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गिलोय के स्वास्थ्य लाभ और नुकसान

गिलोय के स्वास्थ्य लाभ और नुकसान

गिलोय जंगल झाड़ियों में पाया जाता है जिसकी पत्तियों का आकार पान के पत्तों के आकार का होता है, रंग गहरा हरा होता है। गिलोय भारत में वैसे तो सर्वत्र पायी जाती है परन्तु असम, कर्नाटक, कुमायूं तथा बिहार में काफी मात्रा में पायी जाती है। गिलोय का वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया है। गिलोय को कई नामों से जाना जाता है। गिलोय को संस्कृत भाषा में अमृत वल्ली, गुडूची, कुण्डलिनी, छिन्ना, मधुपर्णी तथा वत्सादनी नामों से जाना जाता है। हिन्दी भाषा में गुडुचि तथा गिलोय के नाम से जाना जाता है। गिलोय को गुजराती भाषा में गलो, कन्नड़ में अमृतबल्लि, तेलगू में टिप्पाटिगो तथा पंजाबी में गिलो व गलो नाम से जाना जाता है। आयुर्वेदानुसार गिलोय जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसी के गुणों के धारण कर लेती है। जो गिलोय नीमा के पेड़ पर चढ़ती है वह नाम के गुण को ग्रहण कर लेती है तथा नीम गिलोय कहलाती है। नीम गिलोय में सर्वाधिक औषधीय गुण पाये जाते हैं।

गिलोय त्रिदोष शामक है जो वात, पित्त व कफ तीनों दोषों का शमन करती है। गिलाय दीपन, पाचन, पित्तसारक, कुष्ठघ्न, तृषानिग्रहण, अनुलोमन तथा कृमिघ्न है।  गिलोय में तमाम औषधीय  गुण पाये जाते हैं। गिलोय का सेवन गिलोय जूस या गिलोय स्वरस, गिलोय चूर्ण तथा गिलोय सत्व के रूप में किया जाता है। जहां पर गिलोंय के सेवन से कई लाभ होते हैं वहीं पर अधिक सेवन करने से कुछ नुकसान भी होते हैं। इस लेख में गिलोय में पाये जाने वाले तत्वों, सेवन से होने वाले कुछ विशिष्ट लाभों तथा नुकसान को प्रकाशित किया जा रहा है।

गिलोय में पाये जाने वाले तत्व

गिलोय में मुख्य रूप से गिलोइन नामक एक कड़ुआ ग्लूकोसाइड, गिलोइमिन, कैसमेंथिन, पामरिन, टीनोस्पोरिक,  स्टार्च, अल्कोहल, ग्लिसराल, कई प्रकार के वसा अम्ल, कैल्शियम, तांबा, मैंगनीज, आयरन तथा फास्फोरस पाये जाते हैं। गिलोय में एंटीआक्सीडेन्ट, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटासिड तथा कैंसर रोधी गुण पाये जाते हैं।

गिलोय के स्वास्थ्य लाभः

1. संग्रहणी रोग ठीक हो जाता है

गिलोय, सोंठ, अतीस एवं मोथा समभाग लेकर पानी में डालकर क्वाथ बनाकर 25 से 30 मिली0 क्वाथ का सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक हो जाता है।

2. मधुमेह रोग में अत्यन्त लाभकारी है

गिलोय के तने तथा पत्तियों को पीस कर जूस निकाल कर स्वच्छ कपड़े से छानकर प्रातः खाली पेट 15 से 20 मिली0 गिलोय जूस को 200 मिली0 पानी में मिलाकर सेवन करें तथा एक घण्टे तक कुछ न खायें। इसका नियमित रूप से सेवन करने से शरीर में इन्सुलिन का स्राव बढ़ कर ब्लड शुगर लेबल कम हो जाता है।

3. गठिया रोग में अत्यन्त लाभदायक है

15 से 20 मिली0 गिलोय जूस को 200 मिली0 पानी में मिलाकर प्रातः, सायं खाली पेट सेवन करें तथा एक घण्टे तक कुछ न खायें। इसका नियमित रूप से सेवन करने गठिया रोग में काफी लाभ मिलता है।

4. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है

15 से 20 मिली0 गिलोय जूस को 200 मिली0 पानी में मिलाकर प्रातः, सायं खाली पेट सेवन करें तथा एक घण्टे तक कुछ न खायें। इसका नियमित रूप से सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है जिससे सर्दी, जुकाम, बुखार व कई संक्रामक रोगों से शरीर की रक्षा होती है। गिलोय जूस के स्थान पर गिलोय काढ़े का भी उपयोग किया जा सकता है।

5. वमन शान्त हो जाता है

10 से 20 मिली0 गिलोय जूस में 5 से 7 ग्राम पिसी हुई मिश्री मिला कर दिन में दो बार सेवन करने से वमन रोग ठीक हो जाता है।

6. डेंगू तथा मलेरिया बुखार में आश्चर्यजनक लाभ होता है

20 मिली0 गिलोय जूस या गिलोय स्वरस को 200 मिली0 पानी में मिलाकर प्रातः, सायं खाली पेट सेवन नियमित रूप से सेवन करने से डेंगू और मलेरिया बुखार में बहुत जल्द काफी लाभ हो जाता है।

7. खांसी में काफी लाभ होता है

नीम गिलोय के 200 मिली0 काढ़ें में 2 चम्मच शुध्द शहद मिलाकर दिन में दो बार नियमित रूप से सोवन करने से धीरे-धीरे खांसी ठीक हो जाती है। मधुमेह रोग से पीड़ित लोगों को इस मिश्रण में शहद नही मिलाना चाहिए।

8. एनीमिया रोग ठीक हो जाता है

20 मिली0 गिलोय जूस में एक चम्मच शुध्द शहद मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से एनीमिया रोग ठीक हो जाता है। जिन्हें मधुमेह की समस्या हो वे शहद के स्थान पर 20 मिली0 पानी का प्रयोग करें, शहद का सेवन न करे।

9. कील मुहांसो में लाभकारी है

गिलोय के तने का पेस्ट बनाकर कील मुहांसो पर दिन में दो से तीन बार लगानें से धीरे-धीरे कील मुहांसे ठीक हो जाते हैं।

10. अन्य लाभ

हाई ब्लड प्रेशर कम हो कर नियन्त्रित हो जाता है। त्वचा की एलर्जी में अत्यन्त लाभकारी है। अस्थमा रोग में अत्यन्त लाभकारी है। क्रोनिक फीबर (पुराना बुखार) ठीक हो जाता है। पाचन शक्ति बढ़ जाती है। बढ़ती उम्र का प्रभाव कम हो जाता है।

गिलोय के सेवन के नुकसान

गिलोय के सेवन से लो ब्लड प्रेशर वालों का ब्लड प्रेशर काफी कम होने की समस्या हो सकती है इसलिए लो  ब्लड प्रेशर वालों को गिलोय का सेवन नही करना चाहिए। गिलोय की तासीर गर्म होने के कारण अधिक सेवन करने से पेट में जलन तथा गैस की समस्या हो सकती है। गिलोय ब्लड में शर्करा के लेबल को कम कर देता है इसलिए जिनके ब्लड में शर्करा कम हो उन्हें गिलोय का सेवन नही करना चाहिए। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय का सेवन नही करना चाहिए।

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