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विटामिन-D की कमी से शुगर बढ़ जाने के कारण हो सकता है हार्ट फेल

विटामिन-D की कमी से शुगर बढ़ जाने के कारण हो सकता है हार्ट फेल

विटामिन एक कार्बनिक रसायन है जिसकी सन् 1911 ई0 में प्रसिध्द वैज्ञानिक फंक ने किया था। विटामिन मानव शरीर का रक्षात्मक पदार्थ कहलाता है जो खाद्य पदार्थों से प्राप्त होते हैं तथा मानव शरीर की विभिन्न उपापचयी क्रियाओं पर नियन्त्रण रखते है। विटामिन-D वसा में घुलनशील एक विटामिन है जिसका रासायनिक नाम कैल्सीफिरोल है। विटामिन-D का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य का प्रकाश है। दूध, अण्डा तथा मछली के तेल में भी विटामिन-D पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन-D की कमी से रिकेट्स नामक रोग हो जाता है जिसमें शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती है तथा चोट लगनें पर टूट जाती हैं। विटामिन-D का संश्लेषण मनुष्य के शरीर में होता है। विटामिन-D का संश्लेषण सूर्य के प्रकाश में उपस्थित पराबैगनी किरणों द्वारा त्वचा के कोलेस्ट्राल के माध्यम से होता है। विटामिन-D शरीर की हड्डियों को मजबूत करती है जिससे रिकेट्स रोग नही होता है। विटामिन-D की कमी से मधुमेह रोग होने के कारण हार्ट फेल हो सकता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में विटामिन-D की कमी अधिक होती है जिसका मुख्य कारण सूर्य की धूप में कम निकलना है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मधुमेह रोग अधिक होता है। महिलाओं में अधिकांशतः मधुमेह रोग विटामिन-D की कमी के कारण ही होता है। प्रस्तुत लेख में विटामिन-D, मधुमेह रोग एवं हृदय के परस्पर सम्बन्ध, विटामिन-D की कमी के कारण, विटामिन-D की कमी के लक्षण तथा विटामिन-D की कमी को दूर करने के कुछ प्रमुख उपायों पर प्रकाश डाला जा रहा है। जिसका भलीभांति अध्ययन कर ज्ञान अर्जित कर के लाभ उठाया जा सकता हैं।

विटामिन-D, मधुमेह रोग तथा हृदय का सम्बन्ध

विटामिन-D शरीर की हड्डियां मजबूत करने के साथ-साथ इन्सुलिन नामक हार्मोन को नियन्त्रित करता है। इन्सुलिन हार्मोन रक्त की शर्करा को ऊर्जा में परिवर्तित करता है जिसके कारण रक्त में शर्करा नही बढ़ती तथा नियन्त्रित रहती है। रक्त में शर्करा की मात्रा नियन्त्रित रहने के कारण मधुमेह रोग नही होता है। मधुमेह रोग न होने के कारण हृदय स्वस्थ रहता है। हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, “विटामिन-D तथा इसकी सांकेतिक प्रक्रिया हृदय के पेशीय ऊतकों से सम्बन्धित इंसुलिन हार्मोन की संवेदनशीलता को प्रभावित करती है, विटामिन-D की कमी से इंसुलिन हार्मोन की कमी हो जाने के कारण हृदय के पेशीय ऊतकों में शर्करा की मात्रा बहुत अधिक हो जाने पर हृदय (हार्ट) फेल हो सकता है। मानव शरीर में 15 नैनोग्राम प्रति मिली0 से कम विटामिन-D होने पर हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है”। इस प्रकार विटामिन-D मानव शरीर की हड्डियां मजबूत करने के साथ-साथ हृदय को स्वस्थ रखनें में भी सहायक है।

विटामिन-D की कमी के मुख्य कारण

  1. सूर्य को प्रकाश में न बैठना।
  2. विटामिन-डी से समृध्द भोज्य पदार्थों दूध, दही, पनीर, पालक, सायाबीन, अण्डा, मछली आदि का सेवन न किया जाना।
  3. शरीर में अधिक मोटापा आ जाना आदि।

विटामिन-D की कमी के लक्षण

हड्डियों तथा जोड़ों में दर्द होता है तथा मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। रक्तचाप बढ़ जाता है। घाव भरने में अधिक समय लगता है। चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। थकान, घबराहट तथा बेचैनी होती है। सिर के बाल झड़ने लगते हैं। हाथ-पैर में सूजन आ जाती है। शरीर सुस्त हो जाता है, दिन में भी नींद आती है। तनाव उत्पन्न हो जाता है। शरीर में कोलेस्ट्राल लेबल बढ़ जाता है तथा डिप्रेशन की समस्या हो जाती है।

विटामिन-D की कमी दूर करने के उपाय

  1. भोजन में दूध, दही, पनीर, दही, छाछ, मक्खन, मशरूम, पालक, सोयाबीन, आंरेंज जूस, अण्डा, मछली आदि का नियमित सेवन किया जाय।
  2. सुबह सूर्य के प्रकाश में 30 से 35 मिनट बैठें।
  3. सुबह, दोपहर तथा शाम को एक-एक गिलास गाजर के जूस का नियमित सेवन किया जाय।
  4. कैफीनयुक्त पदार्थों, बाजार में मिलने वाले शीतल पेय (जैसे-पेप्सी, स्प्राइट, कोका कोला, सोडा वाटर आदि), जंक फूड, तले हुए वसायुक्त खाद्य पदार्थों और चीनी से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न किया जाय।

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