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Ligament injury in Hindi

Ligament injury in Hindi

लिगामेन्ट इंजरी को जानने से पहले यह जानना आवश्यक है कि लिगामेन्ट क्या है तभी लिगामेन्ट इंजरी को समझा जा सकता है अन्यथा नही। इस लेख में  लिगामेन्ट तथा लिगामेन्ट इंजरी पर प्रकाश डाला जा रहा है जिसका अध्ययन अत्यन्त लाभकारी सिध्द होगा।

लिगामेन्ट का क्या अर्थ है?

लिगामेन्ट अंग्रेजी भाषा का शब्द है। लिगामेन्ट का हिन्दी अर्थ “स्नायुबन्धन” है।

लिगामेन्ट क्या है?

लिगामेन्ट मानव शरीर में पाया जाने वाला फीतानुमा आकृति का मुलायम टिशु है जो कि हड्डी को हड्डी या हड्डी को कार्टिलेज से जोड़ता है जिसके कारण हड्डियों का मूवमेन्ट (घुमाव) आसान हो जाता है। हड्डियों का घुमाव लिगामेन्ट पर ही निर्भर करता है।

लिगामेन्ट का क्या कार्य है?

लिगामेन्ट के कार्य निम्नलिखित हैंः-

  1. लिगामेन्ट हड्डियों को जोड़ने का कार्य करता है।
  2. हड्डियों के जोड़ को मूवमेन्ट प्रदान करता है।
  3. हड्डियों के जोड़ को एक निश्चित स्थान पर बनाये रखने का कार्य करता है।
  4. हड्डी को लिगामेन्ट से जोड़ने का कार्य करता है।

लिगामेन्ट कहां पाया जाता है?

लिगामेन्ट मानव शरीर की हड्डियों के प्रत्येक जोड़ में पाया जाता है। हाथ, पैर की हड्डियों के जोड़, गर्दन की हड्डियों के जोड़ तथा शरीर के अन्य अंगों की हड्डियों जोड़ में पाया जाता है।

पैर के घुटने में पाये जाने वाले लिगामेन्ट

मनुष्य के पैर के घुटने में पाये जाने वाले लिगामेन्ट फीमर तथा टिबिया हड्डी को जोड़ते हैं तथा घुटने को स्थिरता प्रदान करते हैं। मनुष्य के पैर के घुटने में चार प्रकार के लिगामेन्ट पाये जाते हैं जो कि निम्नलिखित हैंः-

  1. पूर्वकाल क्रूसिएट लिगामेन्ट।
  2. पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेन्ट।
  3. मेडियल कोलेटरल लिगामेन्ट।
  4. पार्श्व संपार्श्विक लिगामेन्ट।

पूर्वकाल क्रूसिएट लिगामेन्ट घुटने के केन्द्र में पाया जाता है। यह लिगामेन्ट टिबिया हड्डी के सामने के भाग को फीमर हड्डी के पिछले भाग से जोड़कर तिरछा चलता है। यह लिगामेन्ट घुटने के पीछे तथा आगे की गतिविधि को नियन्त्रित करते हुए घुटने के जोड़ को स्थिर रखने में मदद करता है तथा टिबिया हड्डी को फीमर हड्डी के सामने आगे बढ़ने से रोंकता है।

पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेन्ट घुटने के जोड़ के अन्दर पिछले भाग में पाया जाता है। यह लिगामेन्ट टिबिया हड्डी के पीछे के भाग को फीमर हड्डी के सामने के भाग से जोड़ते हुए तिरछा चलता है तथा घुटने के आगे और पीछे की गतिविधियों को नियन्त्रित करने में मदद करता है। टिबिया हड्डी को पीछे जाने से रोंकता है। घुटने के जोड़ को स्थिर रखता है।

मेडियल कोलेटरल लिगामेन्ट घुटने के अन्दरूनी भाग में फीमर हड्डी को टिबिया हड्डी से जोड़ता है तथा घुटने के जोड़ को पैर के किनारे के किसी भी आघात से बचाते हुए घुटने को आन्तरिक स्थिरता प्रदान करता है।

पार्श्व संपार्श्विक लिगामेन्ट घुटने के फीमर हड्डी के बाहरी भाग को टिबिया हड्डी के बाहरी भाग से जोड़ते हुए घुटने को किसी भी आघात से बचाते हुए बाहरी स्थिरता प्रदान करता है।

लिगामेन्ट इंजरी क्या है?

जब अचानक किये गये मूवमेन्ट से, ऊंचाई से कूदने या गिर जाने से या किसी आघात से लिगामेन्ट में मोच आ जाता है, लिगामेन्ट में खिंचाव आ जाता है, लिगामेन्ट कम या अधिक मात्रा में फट जाता है या टूट जाता है , तो इसे लिगामेन्ट इंजरी कहते हैं।

चलने, दौड़ने, अचानक मुड़ने पर या उछल कूद करने पर शरीर का सम्पूर्ण भार पैर के घुटनों पर पड़ता है जिसके कारण अधिकांशतः पैर के घुटनों में ही लिगामेन्ट इंजरी होती है। शरीर के अन्य भागों में पाये जाने वाले लिगामेन्ट में इंजरी बहुत ही कम होती है।

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