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Thyroid causes, symptoms and treatment in Hindi

Thyroid causes, symptoms and treatment in Hindi (थायराइड के कारण, लक्षण व उपचार)

मानव शरीर में जितने भी रोग होते हैं वे वात, पित्त या कफ दोष के ही कारण होते हैं। यदि खान-पान तथा जीवन शैली को संयमित कर के वात, पित्त तथा कफ को सन्तुलित ऱखा जाये तो मानव शरीर को रोगों से मुक्त रखा जा सकता है। मानव शरीर में जब वात तथा कफ दोष हो जाते हैं तो थायराइड नामक रोग की उत्पत्ति होती है। वात तथा कफ को सन्तुलित कर के थायरायड नामक बीमारी को जड़ से ठीक किया जा सकता है। थायरायड की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं तथा बुजुर्गों में अधिक होती है।

थायरायड ग्रन्थि मानव शरीर में गले में स्वर यन्त्र के नीचे सामने की तरफ पायी जाती है जो तितली को आकार की होती है। थायरायड ग्रन्थि मानव शरीर की अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रन्थि है जो कि ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन स्रावित करती है जो कि मानव शरीर की तमाम गतिविधियों को नियन्त्रित करती है। थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट (T.S.H.Test) थायरायड ग्रन्थि से स्रावित होने वाले ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन को नियन्त्रित करती है।

थायरायड ग्रन्थि रक्त में कोलेस्ट्राल, शुगर व फास्फोलिपिड की मात्रा तथा प्रोटीन, वसा व कार्बोहाइट्रेट के चपापचय और हृदय गति व ब्लड प्रेशर को नियन्त्रित करता है। हड्डियों, पेशियों तथा लैगिक वृध्दि को भी नियन्त्रित करता है।

थायरायड रोग के कारण

  1. भोजन में आयोडीन की अधिक या कम मात्रा का होना।
  2. गर्भावस्था के दैरान महिलाओं में हार्मोन असन्तुलित होना।
  3. मानसिक तनाव के कारण थायरायड हार्मोन का अधिक सक्रिय हो जाना।
  4. आहार में सोया उत्पादों का अधिक मात्रा में उपयोग।
  5. अधिक तले भोजन तथा जंक फूड का प्रयोग किया जाना।
  6. मोटापा आना।
  7. वजन बढ जाना।
  8. हाई ब्लड प्रेशर होना।
  9. मधुमेह होना।
  10. ग्वायटर रोग होना।
  11. बांझपन होना।
  12. गर्भपात हो जाना।
  13. बच्चे का समय से पूर्व हो जाना।
  14. होशिमोटो रोग।
  15. यह रोग आनुवांशिक है। यदि परिवार में किसी को हुआ है तो अन्य सदस्यो को भी हो सकता है।

थायरायड रोग के लक्षण

  1. अचानक वजन घटने या बढ़ने लगना।
  2. पल्स रेट घट या बढ़ जाना।
  3. मासिक धर्म अनियमित हो जाना।
  4. असमय बालों का पतला होकर झड़ना व सफेद होने लगना।
  5. प्रजनन क्षमता में असन्तुलन।
  6. सोचने-समझने की क्षमता का ह्रास हो जाना।
  7. ब्लड प्रेशर हाई हो जाना।
  8. गले में सूजन आ जाना।
  9. याददाश्त कमजोर हो जाना।
  10. चेहरे पर सूजन आ जाना।
  11. जोड़ों में सूजन या दर्द होने लगना।
  12. त्वचा रूखी हो जाना तथा खुजली होना ।
  13. पसीना अधिक या कम आना।
  14. कब्ज, तनाव तथा थकावट होने लगना।
  15. चिड़चिड़ापन, घबराहट तथा अनिद्रा की शिकायत होना।
  16. मेटाबालिज्म बढ़ या घट जाना। ।
  17. आस्टियोपोरोसिस हो जाना।
  18. अनिद्रा, हाथों में कंपकंपी तथा मांसपेशियो में दर्द होना।
  19. भूख अधिक लगने तथा आहार अधिक लेने पर भी वजन में कमी होना।
  20. महिलाओं में बांझपन की समस्या हो जाना।
  21. रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ जाना।
  22. चेहरे और आंखों में सूजन हो जाना।
  23. सर्दी के प्रति अधिक संवेदनशीलता उत्पन्न होना।

थायरायड रोग के प्रकार

थायरायड रोग 4 प्रकार की होती हैः

  1. हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid)।
  2. हायपोथायराइडिज्म थायरायड (Hypothyroidism Thyroid)।
  3. ग्वायटर (Goiter)।
  4. थायरायड कैंसर (Thyroid cancer)।

हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid)

हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid) रोग में थायरायड ग्रन्थि अति सक्रिय हो जाती है जिसके कारण थायरायड ग्रन्थि आवश्यकता से अधिक मात्रा में ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन उत्पन्न करने लगती है। इस बीमारी में ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन की अधिकता हो जाती है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है। इस रोग में मेटाबालिज्म बढ़ जाता है, भूख अधिक लगती है, वजन घटने लगता है, घबराहट तथा चिड़चिड़ापन आ जाता है, अनिद्रा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, पल्स रेट बढ़ जाती है, ओस्टियोपोरोसिस हो जाता है, बाल झड़ने लगते हैं, पसीना अधिक आता है तथा महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित हो जाता है।

हायपोथायरायडिज्म थायरायड (Hypothyroidism Thyroid)

हायपोथायराइडिज्म थायरायड (Hypothyroidism Thyroid) रोग में थायरायड ग्रन्थि की सक्रियता काफी कम हो जाती है जिसके कारण थायरायड ग्रन्थि बहुत कम मात्रा में ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन उत्पन्न करती है या इन हार्मोन्स का उत्पादन ही बन्द कर देती है। इस बीमारी में ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) नामक हार्मोन की कमी हो जाती है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है। इस रोग में मेटाबालिज्म घट जाता है, भूख कम लगती है, वजन बढ़ने लगता है, रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ जाता है, सोचने-समझने की क्षमता का ह्रास हो जाता है, पल्स रेट घट जाती है, कब्ज व थकान तथा तनाव होने लगता है, बाल झड़ने लगते हैं, सर्दी में संवेदनशालता बढ़ जाती है, पसीना कम होता है, चेहरे तथा आंखों में सूजन आ जाती है, त्वचा में रूखापन होकर खुजली होने लगती है तथा महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित होकर इसकी अवधि 28 दिन के स्थान पर लगभग डेढ़ माह तक हो जाती है तथा बांझपन भी हो सकता है।

ग्वायटर (Goiter)

ग्वायटर (Goiter) रोग आयोडीन की कमी के कारण होता है। इसे घेंघा रोग के नाम से जाना जाता है जो कि आयोडीनयुक्त दवा के सेवन से आयोडीन सामान्य होकर ठीक हो जाता है।

थायरायड कैंसर (Thyroid cancer)

थायरायड कैंसर (Thyroid cancer) में थायरायड ग्रन्थि मे गांठ बन जाती है। गांठ बड़ी हो जाने पर आहार निगलने में कठिनाई होने लगती है।

थायरायड रोग का उपचार

थायरायड समस्या होने पर इसे हल्के में नही लेना चाहिए। तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करके नियमित इलाज कराना चाहिए। हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid), हायपोथायराइडिज्म थायरायड (Hypothyroidism Thyroid) तथा ग्वायटर (Goiter) का इलाज आसान होता है जो कि पथ्य, अपथ्य का पालन करते हुए नियमित दवा के सेवन से आसानी से ठीक हो जाता है।

थायरायड कैंसर (Thyroid cancer) में जब गांठ बड़ी होकर कैंसर का रूप धारण कर लेती है तब मरीज को आहार निगलने या सांस लेने में परेशानी होने लगती है तो ऐसी स्थिति में इसका एकमात्र इलाज सर्जरी है। सर्जरी में थायरायड का कुछ भाग या पूरा भाग निकाल दिया जाता है। सर्जरी के बाद रेडियोआयोडीन थेरेपी की जाती है ताकि सर्जरी के बाद यदि कोई कैंसर सेल अन्दर रह गया हो तो वह पूरी तरह से नष्ट हो जाये।

थायरायड रोग का घरेलू उपचार

  1. सौ ग्राम लौकी के टुकड़ें, 5 से 6 बूंद नीबू के रस, 5 से 6 पुदीना पत्ती, 4 से 5 काली मिर्च का पाउडर तथा एक चुटकी आयोडीनयुक्त नमक तो एक गिलास पानी में मिलाकर मिक्सर में डालकर पीस कर कपड़े से छानकर जूस के सुबह खाली पेट सेवन करने से इसमें पाया जाने वाला एण्टीथायरायड गुण बढ़े हुए थायरायड हार्मोन को कम कर देता है जिससे हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid) रोग में काफी लाभ होता है।
  2. एक चम्मच तुलसी के रस में ½ चम्मच एलोवेरा मिला कर सुबह-शाम नियमित रुप से सेवन करने से थायरायड रोग ठीक हो जाता है।
  3. रात के सोते समय गाय के गुनगुने दूध के साथ एस चम्मच अश्वगन्धा चूर्ण को नियमित सेवन करने से हार्मोन्स सन्तुलित होकर थायरायड ठीक हो जाता है।
  4. कुकिंग आयल के रूप में नारियल तेल का नियमित उपयोग करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ होता है।
  5. प्रतिदिन सबह-शाम गाय के दूध में हल्दी मिला कर पीने से थायरायड रोग मे काफी लाभ होता है।
  6. कंचनार तथा पुनर्वा मिश्रित काढ़े का नियमित सेवन करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ होता है।
  7. रात को सोते समय गुनगुने जल के साथ एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का नियमित प्रयोग करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ होता है।
  8. सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी के चूर्ण को एक गिलास फल के रस या गुनगुने पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करने से अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड थायरायड ग्रन्थि की कार्य प्रणाली को नियन्त्रित कर देता है तथा थायरायड रोग ठीक हो जाता है।
  9. एक गिलास गर्म जल में एक चम्मच नारियल के तेल मिला कर नियमित रूप से सेव न करने पर थायरायड रोग मे काफी लाभ मिलता है।
  10. काली मिर्च के 5 से 7 दाने को पीस कर एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर नियमित रुप से सेवन करने पर काली मिर्च में पाया जाने वाला पिपरिन नामक तत्व थायरायड हार्मोन को नियन्त्रित कर देता है जिससे थायरायड रोग मे काफी लाभ मिलता है।
  11. अदरक के एक मध्यम टुकड़ें को बारीक काटकर एक कप पानी में डालकर गरम करें, उबाल आ जाने पर ठण्डा होने के लिए रख दें, हल्का गरम हो जाने उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित सेवन करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ मिलता है।
  12. एक चम्मच आंवला चूर्ण को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से आंवले में पाया जाने वाला एण्टी थायरायड गुण थायरायड को कम कर देता है हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid) रोग ठीक हो जाता है।
  13. आवश्यकतानुसार धनिया पत्ती बारीक पीस कर एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबहखाली पेट नियमित रूप से सेवन करने से धनिया पत्ती में पाया जाने वाला एण्टी थायरायड गुण थायरायड को कम कर देता है जिससे हायपरथायराइडिज्म थायरायड (Hyperthyroidism Thyroid) मे काफी लाभ मिलता है।
  14. एक कप गुनगुने पानी में 25 मिलीलीटर एलोवेरा जूस के मिलाकर सुबह-शाम खाली पेट या खाने से आधा घण्टे पूर्व नियमित रूप सेवन करने से हाइपोथायराइड की समस्या में थायरायड ग्रन्थि सक्रिय होकर थायरायड हार्मोन बनाने लगती है जिससे हायपोथायराइडिज्म थायरायड (Hypothyroidism Thyroid) रोग ठीक हो जाता है।
  15. एक कप दही में एक चुटकी काला नमक मिला कर सुबह-शाम सेवन करने से आयोडीन की कमी के कारण होने वाली थायरायड समस्या में काफी लाभ मिलता है।

योगासन तथा प्राणायाम से उपचार

  1. नियमित रूप से प्राणायाम तथा ध्यान करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ होता है।
  2. नियमित रूप से सूर्य नमस्कार, मत्स्यासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, उष्ट्रासन तथा पवनमुक्तासन का नियमित अभ्यास करने से थायरायड रोग मे काफी लाभ मिलता है।

थायरायड रोग के इलाज हेतु की जाने वाली जांच / चेस्ट

थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट (T.S.H. Test) यह टेस्ट थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन की जांच के लिए किया जाता है जिसके माध्यम से थायरायड ग्रन्थि से स्रावित होने वाले हार्मोंन  ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) तथा थायराक्सिन (टी-4) के लेवल / स्थिति का पता चलता है। T.S.H. का सामान्य स्तर 0.45 से 5.0 mlU/L होता है। यदि जांच में T.S.H. का लेबल सामान्य स्तर से अधिक अर्थात् 5.0 mlU/L से अधिक होता है तो हायपोथायराइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है। यदि जांच में T.S.H. का लेबल सामान्य स्तर से कम अर्थात् 0.45 mlU/L से कम होता है तो हायपरथायरॉइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है।

ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) टेस्टः,इस जांच में ट्राई-आयोडोथायरोनिन (टी-3) का लेबल अधिक होने पर हायपरथायराइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है।

थायराक्सिन (टी-4) टेस्टः इस जांच में थायराक्सिन (टी-4) का लेबल अधिक होने पर हायपरथायराइडिज्म रोग होने की पुष्टि होती है।

थायरायड एण्टीबाडी टेस्टः इस टेस्ट के माध्यम से ग्रेव्स रोग तथा होशिमोटो रोग का पता लगाया जाता है।

थायरायड रोग के मरीज को क्या-क्या खाना चाहिए?

थायरायड के मरीज का निम्नांकित चीजें खानी चाहिए-

  1. आयोडीन युक्त आहार लेना चाहिए।
  2. पर्याप्त मात्रा मे आइरन युक्त हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों तथा कम वसायुक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
  3. विटामिन व मिनरल युक्त सन्तुलित आहार का सेवन करना चाहिए।
  4. बादाम, काजू, सूरजमुखी,  दही, गाजर, अदरक, धनिया, गेहूं, ज्वार, बाजरा, बीन्स, मछली, मक्का, चना एवं फाइबरयुक्त आहार का अधिकाधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।
  5. भोजन में जैतून के तेल का प्रयोग करना चाहिए।

थायरायड रोग के मरीज को क्या-क्या नहीं खाना चाहिएः

थायरायड के मरीज का निम्नांकित चीजें नही खानी चाहिए-

  1. सेचुरेटेड फैट (मीट, मछली), साफ्ट ड्रिंक तथा अन्य पेय पदार्थ (पेप्सी, थम्स अप, कोका कोला आदि) का सेवन नही करना चाहिए।
  2. दूध का सेवन करने से T.S.H. लेबल प्रभावित हो जाता है इसलिए दूध का सेवन नही करना चाहिए।
  3. जंक फूड (पिज्जा, बर्गर, चिप्स, चाकलेट, कैंडी आदि), नशायुक्त पदार्थों (अल्कोहल, बींड़ी, सिगरेट, अफीम, कोकीन आदि) तथा कार्बोहाइड्रेटयुक्त आहार का सेवन नही करना चाहिए

थायरायड समस्या से बचने के उपायः

नियमित रूप से प्राणायाम तथा योगासन (सूर्य नमस्कार, मत्स्यासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, उष्ट्रासन तथा पवनमुक्तासन) का नियमित अभ्यास करना चाहिए। आयोडीनयुक्त नमक का सेवन करना चाहिए। नशीले पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए। तली भुनी चीजों का सेवन नही करना चाहिए। अचानक वजन घटने पर थायरायड जांच करवानी चाहिए। सन्तुलित आहार लेना चाहिए।

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