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Treatment of Thyroid problem in Hindi

Treatment of Thyroid problem in Hindi (थायराइड रोग का इलाज)

थायराइड एक गम्भीर समस्या है जिसमें कई प्रकार की समस्याएं होती है। प्रत्येक समस्या का अलग-अलग इलाज होता है। इस लेख में विभिन्न थायरायड समस्याओं तथा उनके इलाज पर प्रकाश डाला जा रहा है। थायरायड में होने वाली विभिन्न समस्याओं तथा उनका इलाज निम्नवत हैः-

हाइपोथायराइडिज्म रोग

यह एक ऐसी समस्या है जिसमें थायराइड ग्रन्थि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन नही बना पाती हैं जिसके कारण रक्त में थायराइड हार्मोन की कमी हो जाती है। यह समस्या पिट्यूटरी ग्रन्थि में चोट लग जाने, थायराइड ग्रन्थि का विनाश हो जाने, रेडियोधर्मी आयोडीन आदि कारणों से होती है। हाइपोथायराइडिज्म के मुख्य लक्षण शरीर में थकान, पैरों में सूजन, बाल झड़ना,अधिक नींद आना, कब्ज होना, मांसपेशियों में ऐंठन के साथ दर्द, ठण्ड के प्रति असहिष्णुता, त्वचा का शुष्क हो जाना आदि हैं।

इलाजः  हाइपोथायराइडिज्म समस्या में थायराइड हार्मोंन व टी.एस.एच. हार्मोन के लेबल के अनुसार चिकित्सक द्वारा मरीज के रक्त में थायराइड हार्मोंन व टी.एस.एच. हार्मोन के लेबल को नियन्त्रित करने के लिए थायराइड हार्मोन प्रतिस्थापक दवा (जैसे- थायराक्सिन, लिवो-टी) की खुराक निर्धारित करके सेवन कराते हुए इलाज किया जाता है। समय-समय पर थायराइड हार्मोंन व टी.एस.एच. हार्मोन के लेबल की जांच करायी जाती है तथा रक्त में हार्मोन के लेबल के अनुसार दवा की खुराक में बदलाव किया जाता है। इस दवा का प्रयोग जीवन पर्यन्त हो सकता है।

चिकित्सक द्वारा आवश्यकतानुसार मरीज की जीवन शैली / आहार में बदलाव किया जा सकता है तथा कुछ योग / व्यायाम की सलाह भी दी जा सकती है।

हाइपरथायराइडिज्म रोग

इस समस्या में थायराइड ग्रन्थि अधिक मात्रा में थायराइड हार्मोन बनाने लगती है जिसके कारण रक्त में थायराइड हार्मोन की अधिकता तथा टी.एस.एच. हार्मोन की कमी हो जाती है।

इलाजः  हाइपरथायराइडिज्म की समस्या में मरीज के रक्त में थायराइड हार्मोन को नियन्त्रित करने के लिए चिकित्सक द्वारा थायराइड रोधी दवाएं (जैसे-निओमरकाजोल) की खुराक निर्धारित कर सेवन करायी जाती है। थायराइड ग्रन्थि के प्रभावित हिस्से को सर्जरी के माध्यम से निकाला भी जा सकता है। मरीज की जीवन शैली में बदलाव किया जा सकता है। आहार में बदलाव किया जा सकता है। योग / व्यायाम की सलाह भी दी जा सकती है। चिकित्सक द्वारा समय-समय पर थायराइड हार्मोंन व टी.एस.एच. हार्मोन के लेबल की जांच करायी जाती है तथा रक्त में हार्मोन के लेबल के अनुसार दवा की खुराक में बदलाव किया जाता है।

प्लमर रोग

यह रोग 50 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे स्त्रियों व पुरुषों में हो सकता है जिनके रक्त में थायराइड हार्मोन की मात्रा सामान्य से थोड़ी सी अधिक हो जाती है। भूख में बढ़ोत्तरी, स्वभाव में चिडि़चिड़ापन, आस्टियोपोरोसिस, दिल की धड़कन बढ़ जाना, थकान, गर्मी के प्रति असहिष्णुता, मांसपेशियां कमजोर हो जाना इस रोग के मुख्य लक्षण हैं।

इलाजः  चिकित्सक द्वारा आवश्यकतानुसार इस रोग का इलाज एण्टीथायराइड दवाओं, रेडियोधर्मी आयोडीन तथा सर्जरी के माध्यम से किया जाता है।

विषाक्त एडेनोमा रोग

यह थायराइड ग्रन्थि में बढ़ने वाला एक सौम्य ट्यूमर है जो हाइपरथायराइडिज्म के लगभग 3 से 5 प्रतिशत मामलों मेंं होता है। कई ट्यूमर की उपस्थिति को ग्वायटर कहा जाता है। शरीर में कंपकंपी का अनुभव होना, मांसपेशियां कमजोर हो जाना, वजन कम हो जाना, दस्त, भूख बढ़ जाना आदि इस रोग के  मुख्य लक्षण हैं।

इलाजः  चिकित्सक द्वारा रोग की प्रकृति के अनुसार इस रोग का इलाज एण्टीथायराइड दवाओं, रेडियोधर्मी आयोडीन तथा सर्जरी के माध्यम से किया जाता है।

थायराइड नोड्यूल्स रोग

थायराइड ऊतकों के अनियमित विकसित हो जाने के कारण या आयोडीन की कमी के कारण या थायराइड ग्रन्थि में अधिक सूजन हो जाने के कारण थायराइड ग्रन्थि में गांठ बन जाती है जिसे थायराइड नोड्यूल्स कहा जाता है। त्वचा का शुष्क हो जाना, मांसपेशियों में कमजोरी हो जाना, स्वभाव में चिड़िचिड़ापन आ जाना, अचानक शरीर का वजन कम हो जाना, ठण्डक के प्रति असहिष्णुता, दिल की धड़कन अनियमिति हो जाना, स्मृति कमजोर हो जाना आदि थायराइड नोड्यूल्स के मुख्य लक्षण हैं।

इलाजः  प्रत्येक थायराइड नोड्यूल्स में कैंसर नही होता परन्तु किसी-किसी में कैंसर हो सकता है। चिकित्सक द्वारा थायराइड नोड्यूल्स का बायोप्सी परीक्षण कराने के उपरान्त समुचित दवाओं, थायराइड हार्मोन थेरेपी या सर्जरी करते हुए इलाज किया जाता है।

थायराइड कैंसर रोग

जब थायराइड कोशिकाएं काफी तेजी से बढ़ने लगती है तथा मरती नही हैं तो थायराइड कैंसर बन जाती हैं। गलें में सूजन हो जाना, गर्दन के लिम्फ नोड में सूजन हो जाना और भोजन पानी निगलने में कठिनाई होना थायराइड कैंसर के मुख्य लक्षण हैं। एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर, कूपिक थायराइड कैंसर, मेडुलरी थायराइड कैंसर तथा पैपिलरी थायराइड कैंसर थायराइड कैंसर के विभिन्न प्रमुख रूप हैं जिसमें से मेडुलरी थायराइड कैंसर तथा एनाप्लास्टिक थायराइड कैंसर काफी घातक होते हैं।

इलाजः  चिकित्सक द्वारा बायोप्सी परीक्षण कराने के उपरान्त समुचित दवाओं, सर्जरी, रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी, कीमोथेरेपी व टारगेटिक थेरेपी करते हुए इलाज किया जाता है। जीवन शैली में बदलाव भी किया जा सकता है।

नोट- यह लेख केवल जानकारी उद्देश्यों के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह न माना जाए। अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सम्पर्क कर परामर्श अवश्य लें।

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