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विटामिन- ई के15 बेस्ट स्रोत (Best 15 Vitamin- E rich Foods)

विटामिन- ई के15 बेस्ट स्रोत 

विटामिन-ई का रासायनिक नाम टोकोफिरोल है जो कि मानव शरीर में एण्टी-आक्सीडेण्ट का कार्य करता है।   विटामिन-ई वसा में घुलनशील विटामिन है जिसकी कमी से स्त्रियां बांझ हो जाती हैं जिससे सन्तानोत्पत्ति करने से वंचित रह जाती है। विटामिन-ई के कारण ही रक्त पतला रहता है जिसके कारण मानव शरीर में गतिशील रहता है जिससे जीवन चलता है। विटामिन-ई की कमी से रक्त गाढ़ा हो जाता है जिससे दिल का दौरा पड़नें की संभावना बढ़ जाती है। इस प्रकार विटामिन-ई मानव जीवन के लिए संजीवनी का कार्य करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 15 मिग्रा0 विटामिन-ई की आवश्यकता होती है। इस लेख के माध्यम से विटामिन-ई के 15 मुख्य खाद्य श्रोतों  के सम्बन्ध में जानकारी दी जा रही है जिसे अपने जीवन में अपना कर लाभ उठाया जा सकता है।

बादामः बादाम विटामिन-ई का भण्डार है। 100 ग्राम बादाम में 26 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 60 ग्राम बादाम का सेवन अवश्य करना चाहिए जिससे शरीर में विटामिन-ई की कमी नही होती है।

अण्डाः एक अण्डें में 5 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। अण्डे में विटामिन-ई के अलावा प्रोटीन, सल्फर, फैटी एसिड, एल लायसिन नामक एसिड, बायोटिन, विटामिन बी-काम्पलेक्स, विटामिन A, B1, B2 तथा D, मैग्नीशियम, सोडियम, कैल्शियम, ल्यूटिन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, पोटैशियम, फास्फोरस, आयरन, निकोटेनिक अम्ल आदि तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इस प्रकार अण्डा प्रोटीन विटामिन्स तथा मिनरल्स की खान है जिसका प्रतिदिन सेवन करना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन एक से दो अण्डे तक खाना चाहिए।

गेहूं के बीज का तेलः गेहूं के तेल में सबसे अधिक विटामिन-ई पाया जाता है। 100 ग्राम गेहूं के तेल में 255 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है।

सूरजमुखी का बीजः सूरजमुखी का बीज विटामिन-ई का प्रबल स्रोत है। 100 ग्राम सूरजमुखी के बीज में 35.17 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। सोयाबीन के बीज में विटामिन-ई के साथ- साथ मोनो एवं पाली अनसेचुरेटेड फैट भी पाया जाता है।

पालकः पालक में विटामिन-ई प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। विटामिन-ई के साथ-साथ पालक पत्तियों में विटामिन-ए, विटमिन-सी, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि पाये जाते हैं। पालक भारत में सर्वत्र पायी जाती है। पालक एक लोकप्रिय सब्जी है।

जैतूनः जैतून के तेल में विटामिन-ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जैतून का तेल एण्टी-आक्सीडेण्ट का कार्य करता है। जैतून के तेल का नियमित सेवन मधुमेह तथा हृदय रोग के मरीजों के लिए रामबाण का कार्य करता है। जैतून के तेल का नियमित सेवन कोलेस्ट्राल को नियन्त्रित करता है। इस तेल को आलिव तेल के नाम से भी जाना जाता है।

सोयाबीन का तेलः 100 ग्राम सोयाबीन के तेल में 31 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। एस तेल का प्रयोग घरों में शाकाहारी व्यंजन बनाने में किया जाता है। यह सबसे शुध्द खाद्य तेल माना जाता है।

मूंगफलीः मूंगफली विटामिन-ई से समृध्द होती हैं। 100 ग्राम मूंगफली में 10 मिग्रा0 विटामिन-ई पायी जाती है। मूंगफली विटामिन-ई के साथ-साथ वसा, प्रोटीन तथा मैग्नीशियम से भी समृध्द होती है जिसके कारण विटामिन-ई के सेवन से मानव शरीर में हड्डियां भी मजबूत होती है, शरीर का पूर्ण विकास होता है।

पीनट बटरः पीनट बटर में 100 ग्राम में 9.1 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता हैं। पीनट बटर एक लोकप्रिय आहार है जिसे ब्रेड में लगाकर खाया जाता है तथा रोटी के साथ भी खाया जाता है।

ब्लैकबेरीः ब्लैकबेरी उत्तरी अमेरिका में अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है जो कि अत्यन्त स्वादिष्ट तथा विटिमिन व मिनरल से समृध्द होता है। ब्लैकबेरी में भारी मात्रा में विटामिन-ई पाया जाता है जिसके नियमित सेवन से मानव शरीर में विटामिन-ई का कमी दूर हो जाती है।

ओर्गेनोः ओर्गेनो विटिमिन व मिनरल से समृध्द होता है  जिसका सेवन सैंडविच एवं सलाद के साथ किया जाता है। 100 ग्राम ओर्गेनों में 18.26 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। ओर्गेनो के निरन्तर सेवन से विटामिन-ई की कमी पूरी हो जाती है।

अजमोदः अजमोद को अजवाइन के नाम से जाना जाता है जो कि सम्पूर्ण भारत में पायी जाती है तथा विटामिन-ई व विटामिन- के का समृध्द भण्डार है तथा डायबिटीज के मरीजों के लिए अत्यन्त लाभकारी है। सलाद में इसका प्रयोग करने से सलाद का जायका बढ़ जाता है।

पाइन नटः 100 ग्राम पाइन नट में 10 मिग्रा0 विटामिन-ई पाया जाता है। विटामिन-ई के अतिरिक्त इसमें मैग्नीशियम भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। पाइन नट के सेवन सलाद व सैंडविच के साथ किया जाता है।

शतावरः यह सम्पूर्ण भारत में पायी जाने वाली अत्यन्त बलवर्ध्दक व पौष्टिक वनस्पति है जिसे संस्कृत भाषा में शतावरी. नारायणी, शतपदी, शतवीर्या, बहुसुता आदि नामों से जाना जाता है। यह बल, बुध्दि वर्धक, अग्निवर्ध्दक, वात, पित्त शामक वनस्पति है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-ई पाया जाता है।

लाल शिमला मिर्चः यह विटामिन-ई का बहुत अच्छा स्रोत है। 100 ग्राम लाल शिमला मिर्च में 28 मिग्रा0 विटामिन-ई पायी जाती है। विटामिन-ई के साथ-साथ इसमें विटामिन-ए, सी तथा आयरन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। लाल शिमला मिर्च एण्डी आक्सीडेन्ट हैं। इसके निरन्तर सेवन से मेटाबालिज्म बढ़ता है तथा शरीर से अनावश्यक चर्वी समाप्त होकर शरीर को मोटापा घटता है और वजन सन्तुलित हो जाता है।

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