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धूम्रपान के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव

धूम्रपान के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव 

धूम्रपान शब्द अंग्रेजी भाषा के Smoking शब्द का हिन्दी रुपान्तर है। धूम्रपान का इतिहास काफी पुराना है। धूम्रपान सर्वप्रथम बेबीलोनियन सभ्यता से आरम्भ हुआ तथा धीरे-धीरे सम्पूर्ण विश्व में फैल गया। आज विश्व का कोई भी कोना धूम्रपान से अछूता नही है। धूम्रपान को कोई शौकिया करता है तो कोई तनाव से मुक्त होने के लिए। धूम्रपान का प्रचलन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषो में अधिक है। धूम्रपान में सर्वाधिक मात्रा में तम्बाकू का प्रयोग किया जाता है जो लगभग सम्पूर्ण विश्व में आसानी से सुलभ है। भारत में तम्बाकू की खेती बहुतायत मात्रा में की जाती है। धूम्रपान में तम्बाकू को बीड़ी, सिगरेट, चिलम (हुक्का) के माध्यम से जलाकर मुंह द्वारा धुएं को अन्दर खींचकर चखा जाता है और सांस के माध्यम से खींचकर फेफड़ों में ले जाया जाता है जहां पर तम्बाकू में पाया जाने वाला अत्यन्त हानिकारक नशीला तत्व  निकोटीन फेफड़ों द्वारा अवशोषित करके रक्त वाहिनियों के माध्यम से सम्पूर्ण शरीर में पहुंचता है। तम्बाकू का प्रयोग धूम्रपान के अतिरिक्त पान, गुटखा, जर्दा, खैनी (तम्बाकू तथा चूने का मिश्रण) आदि माध्यमों से किया जाता है जिसके द्वारा तम्बाकू में पाया जाने वाला हानिकारक तत्व निकोटीन लार के माध्यम से गले से होते हुए आंत में, आंत से होते हुए लीवर में पहुंचता है। वर्तमान समय में सिगरेट में अफीम व अन्य नशीले पदार्थों का भी प्रयोग किया जाने लगा है।

मानव शरीर पर धूम्रपान / निकोटीनयुक्त उत्पादों के सेवन का अत्यन्त हानिकारक प्रभाव पड़ता है जिसे जानते हुए भी मनुष्य दिन-प्रतिदिन इसका आदी होता जा रहा है जिसके कारण तमाम खतरनाक बीमारियां भारी मात्रा में फैलती जा रही हैं। धूम्रपान के कारण उक्त जानलेवा बीमारियों का शिकार होकर प्रतिवर्ष विश्व में करोड़ों  व्यक्ति मौत का शिकार हो रहे हैं। इस लेख के माध्यम से धूम्रपान का मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रमुख हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला जा रहा है जो निम्नवत हैः

  1. फेफड़ा तथा श्वास सम्बन्धी रोग हो जाता हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से दमा, क्षय रोग, निमोनिया (फेफड़ों में पानी भर जाना), फेफड़ों में कैंसर, दमा, क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज आदि प्राणघातक रोग हो जाते हैं।
  2. हड्डियां कमजोर हो जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से आस्टियोपोरोसिस नामक रोग हो जाता है जिसमें मानव शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती है तथा किसी हादसे का शिकार होने पर हड्डियों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है। इस रोग के होने की संभावना बुजुर्ग महिलाओं व पुरुषों में अधिक होती है।
  3. प्रजनन क्षमता कम हो जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से महिलाओं तथा पुरुषों में सेक्स हार्मोन्स पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसके कारण प्रजनन की क्षमता कम हो जाती है, महिलाओं में बांझपन की समस्या तथा पुरुषों में नपुंसकता की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  4. असमय त्वचा में झुर्रियां पड़ जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से शरीर पर असमय त्वचा में झुर्रियां पड़ जाती है जो बुढ़ापे का संकेत देने लगती हैं जिसका प्रसनालिटी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  5. रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से धीरे-धीरे मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है जिसके कारण फेफड़े व श्वास सम्बन्धी रोग तथा अन्य रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है।
  6. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से मानव शरीर में धीरे-धीरे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  7. मधुमेह रोग होने की संभावना बढ़ जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से मानव शरीर में मधुमेह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
  8. हृदय सम्बन्धी रोग हो जाते हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से रक्त कोशिकाओं के धीरे-धीरे नष्ट हो जाने के कारण हृदय सम्बन्धी रोग (जैसे- हाइपरटेंशन, एन्जाइना, स्ट्रोक, अस्थेरोस्क्लेरोसिस व दिल का दौरा पड़ना आदि) हो जाते हैं।
  9. नेत्र सम्बन्धी रोग हो जाते हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से नेत्र दृष्टि कमजोर हो जाती है, धुंधला दिखायी देने लगता है तथा मोतियाबिन्द नामक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
  10. कैंसर रोग होने की संभावना बढ़ जाती हैः धूम्रपान का अधिक सेवन करने से मानव शरीर में मुख, गला, फेफड़ा, लीवर, सीना, किडनी, तिल्ली आदि अंगों में कैंसर नामक प्राणघातक रोग होने का संभावना बढ़ जाती है।

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