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विटामिन की कमी से होने वाले रोग

विटामिन की कमी से होने वाले रोग

विटामिन एक कार्बनिक रसायन है।  विटामिन का आविष्कार सन् 1911 ई0 में प्रसिध्द वैज्ञानिक फंक ने किया था। विटामिन को शरीर का रक्षात्मक पदार्थ कहा जाता है जो खाद्य पदार्थों से प्राप्त होते हैं तथा मानव शरीर की विभिन्न उपापचयी क्रियाओं पर नियन्त्रण  रखते है।

विलेयता के आधार पर विटामिन दो प्रकार के होते हैः

  • जल मे घुलनशील विटामिन – विटामिन B एवं  C
  • वसा में घुलनशील विटामिन-  विटामिन A, D, E तथा  K

विटामिन B के  11 समूह हैं जिनमे से 08 मुख्य हैं । ये हैं-  B1,   B2,  B3,  B5,  B6,  B7,   B11 तथा  B1

विटामिन-A का रासायनिक नाम रेटिनाल, विटामिन-B1 का रासायनिक नाम थायमिन, विटामिन- B2 का रासायनिक नाम राइबोफ्लेविन, विटामिन- B3 का रासायनिक नाम नियासिन, विटामिन- B5 का रासायनिक नाम पैंटाथोनिक एसिड, विटामिन- B6 का रासायनिक नाम पाइरीडाक्सिन, विटामिन- B7 का रासायनिक नाम बायोटीन, विटामिन-B11 का रासायनिक नाम फालिक एसिड, विटामिन-B2 का रासायनिक नाम साइनोकोबालमिन,  विटामिन-C का रासायनिक नाम एस्कार्बिक एसिड, विटामिन-D का रासायनिक नाम कैल्सीफिरोल, विटामिन-E  का रासायनिक नाम टोकोफिरोल, विटामिन-K  का रासायनिक नाम फिलोक्वीनोन है।

विटामिन्स की कमी से होने वाले कुछ विशेष रोग निम्नवत हैः

रतौंधीः

रतौंधी रोग मुख्यतया विटामिन-ए की कमी से होता है। इस रोग में रोगी को निकट की वस्तु तो साफ दिखायी देती है परन्तु सूर्यास्त होते ही दूर की वस्तु धुंधली दिखायी देती है। इस रोग का शीघ्र इलाज न होने पर धीरे-धीरे नेत्र ज्योति घटती जाती है तथा निकट की वस्तु भी धुंधली दिखायी देने लगती है। यह रोग होने पर तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क कर के इलाज कराना चाहिए तथा विटामिन-ए से समृध्द खाद्य पदार्थों दूध, अण्डा, पनीर, काली मिर्च, टमाटर, मेथी, पालक, सोया, धनिया, बधुआ, पुदीना, पत्ता गोभी, आम, सेब, पपीता, गाजर, खीरा, मूली, मछली का तेल आदि का सेवन करना चाहिए।

बेरी-बेरी रोगः

बेरी-बेरी रोग मुख्यतया विटामिन- B1 की कमी के कारण होता है। बेरी-बेरी रोग में पैरो में सूजन आ जाती है, दम घुटने लगता है, पल्स रेट बढ़ जाती है, पैरों में झनझनाहट होने लगती है, मानसिक भ्रम व बोलनें में कठिनाई होने लगती है, आंखें फड़कने लगती है, याददाश्त कम हो जाती है, बुरे सपने आते हैं। बेरी-बेरी रोग होने पर तत्काल रजिस्टर्ड चिकित्सक से सम्पर्क करके इलाज कराना चाहिए तथा थायमिनयुक्त आहार लेना चाहिए।

पेलाग्रा रोगः

पेलाग्रा रोग मुख्यतया विटामिन- B3 के कारण होता है। इस रोग में हाथ, पैर, चेहरे, होंठ पर चकत्ते हो जाते हैं, त्वचा पर खुजली तथा सूजन आ जाती है, त्वचा लाल तथा पर्तदार हो जाती है तथा उसके रंग में परिवर्तन आ जाता है। पेलाग्रा रोग होने पर विटामिन- B3  से समृध्द आहार लेना चाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क करके इलाज कराना चाहिए।

रक्ताल्पता रोगः

रक्ताल्पता रोग  विटामिन- B6 की कमी के कारण होता है। इस रोग में शरीर में रक्त की कमी हो जाती है, बिना किसी श्रम किए ही शरीर में थकान का अनुभव होता है, हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, नाखून, आंखे, हाथों की हथेलियां पीली हो जाती है। यह रोग होने पर विटामिन- B6 से समृध्द आहार लेना चाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क करके अपना इलाज कराना चाहिए।

लकवा (पैरालिसिस)

लकवा रोग मुख्यतया विटामिन- B7 की कमी से होता है। इस रोग में शरीर का एक भाग सुन्न हो जाता है, जुबान लड़खड़ाने लगती है, मुख टेंढ़ा हो जाता है, बोलने में समस्या होने लगती है। यह रोग होने पर जितनी जल्दी हो सके तत्काल चिकित्सक के समक्ष रोगी को ले जा कर समुचित इलाज कराना चाहिए।

स्कर्वी रोगः

स्कर्वी रोग मुख्यतया विटामिन-C की कमी के कारण होता है। इस रोग में शरीर के अंगों में दर्द हता है, ब्लीडिंग होती है, मसूढ़ों में सूजन आ जाती है, दांत कमजोर हो जाते हैं, पैरों में सूजन आ जाती है। स्कर्बी रोग होने पर विटामिन-C से समृध्द आहार (नींबू, संतरा, टमाटर, अंकुरित अनाज।) आदि का नियमित सेवन करना जाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क करके इलाज कराना चाहिए।

बांझपनः

बांझपन रोग को नपुंसकता रोग भी कहा जाता है। यह रोग विटामिन-E की कमी के कारण होता है जो कि स्त्री-पुरुष दोनों में ही होता है। इस रोग में स्त्री-पुरुष सन्तानोत्पत्ति के अयोग्य हो जाते हैं। इस रोग में शुक्राणु बनना या तो कम हो जाता है या बन्द हो जाता है। इस रोग से पीड़ित होने पर विटामिन-E से समृध्द आहार लेना चाहिए तथा किसी रजिस्टर्ड चिकित्सक (सेक्सोलाजिस्ट) से इलाज कराना चाहिए।

पेचिसः

पेचिस रोग मुख्यतया विटामिन-B11 की कमी से होता है। इस रोग में बार-बार शौच जाना पड़ता है, पेट में ऐंठन होती है, मल में रक्त या म्यूकस आता है, पेट साफ नही होता है। यह रोग होने पर  विटामिन-B11 से समृध्द खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, उबले हुए पानी का सेवन करना चाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क कर के इलाज कराना चाहिए।

पाण्डु रोगः

पाण्डु रोग मुख्यतया विटामिन-B12 की कमी के कारण होता है। इस रोग में हीमोग्लोबिन की मात्रा रक्त में काफी कम हो जाती है जो कि ब्लड टेस्ट से पता चलता है। इस रोग में शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है, हृदय की धड़कन बढ़ जाती है, हाथ-पैर पाले पड़ जाते हैं तथा चक्कर आते हैं। इस रोग में विटामिन-B12 से समृध्द आहार का सेवन करना चाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क करके इलाज कराना चाहिए।

रिकेट्स रोगः

रिकेट्स रोग मुख्यतया विटामिन-D की कमी से होता है। इस रोग में हड्डिया कमजोर हो जाती हैं। इस रोग को सूखा रोग भी कहा जाता है। इस रोग से पीडित होने पर हाथ-पैर तथा कंकाल टेंढ़ा हो जाता है, दांतों में कैविटी हो जाती है, हड्डियां टूटने का भय रहता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को विटामिन-D से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए तथा चिकित्सक से सम्पर्क कर के इलाज कराना चाहिए।

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