Yoga

भुजंगासन के 10 फायदे और योगासन विधि – Bhujangasana (Cobra Pose) Benefits and Steps in Hindi

भुजंगासन (Bhujangasana)

भुजंगासन मानव शरीर को स्वस्थ रखने का एक सरल एवं मुख्य योगासन है जिसे सर्पासन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है।

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भुजंगासन करने की विधिः

जमान पर आसन बिछा कर पेट के बल लेट जायें। अपने दोनों हाथ की हथेलियों को इस प्रकार जमीन पर टिकाएं कि वे कन्धों के किनारे के ठीक नीचे रहें तथा दोनों हथेलियां एक दूसरे से सटी हुई हों और उनके अग्र भाग कन्धों की रेखाओं के किनारे हों। दोनों कुहनी मुड़ी हुई हो तथा शरीर के मध्य भाग को स्पर्श करती रहे।

दाहिने या बायें गाल को जमान पर रखते हुए दोनों पैरों की एड़ियों को परस्पर एक दूसरे से सटायें और दोनों पैरों के अंगूठों को जमान पर सपाट रखते हुए सिर को सीधा कर ठोड़ी को जमीन पर रखें। गर्दन एवं सिर को पीछे का तरफ झुकाना प्रारम्भ करें और सांस लेते हुए छाती को उपर की ओर उठाएं। नाभि को भूमि या भूमि के नजदीक रहना चाहिए। कमर से लेकर पैर की अंगुलियों तक का पूरा भाग कड़े बने रहने चाहिए। अब ऊपर की तरफ देखते हुए सांस को रोंके, शरीर को कड़ा बनाये रखें, दोनो कुडनियां मुड़ी हुई तथा धड़ के निकट रहें। इस अवस्था में 6 से 8 सेकेण्ड तक रुकें। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को ढीला करते हुए अपने सिर को जमीन की तरफ झुकाना शुरु करें तथा सिर को जमीन से स्पर्श करायें। ध्यान रहें सिर का जमीन से स्पर्श करना तथा पूरी सांस छूटने की क्रिया एक साथ हो। सिर का जमीन से स्पर्श होने के बाद उसे दाहिनी तरफ घुमाकर गाल को जमीन पर रखें  तथा 6 से 8 सेकेण्ड तक विश्राम करें। इस प्रकार यहां पर भुजंगासन का एक अभ्यास पूरा हुआ। इसी प्रकार उक्त क्रिया को दोहराएं।

प्रारम्भ में इस आसन को मात्र तीन बार करना चाहिए तथा बाद में बढ़ाते हुए पांच बार तक करना चाहिए।

भुजंगासन शरीर को स्वस्थ रखने का एक प्रमुख योगासन है। इसे अस्वस्थ लोगों को नही करना चाहिए परन्तु स्वस्थ लोंगों को यह योगासन अवश्य करना चाहिए। यह योगासन स्त्री पुरूष दोनों की ही लिए विशेष उपयोगी है। यह योगासन सरल है। स्त्री पुरुष इस योगासन को करके लाभ उठा सकते हैं।

यह योगासन सौन्दर्यवर्ध्दक है। दस वर्ष की उम्र से कम उम्र के बच्चों, रजस्वला तथा गर्भवती स्त्रियों को यह योगासन नही करना चाहिए।

भुजंगासन से 10 फायदे / लाभः

  1. भुजंगासन करने से यकृत सम्बन्धी विकारों को नष्ट कर के यकृत को मजबूत बनाता है जो मानव शरीर का मुख्य पाचन तन्त्र है। लीवर तथा किडनी स्वस्थ रहते हैं।
  2. भुजंगासन करने से स्त्रियों के गर्भाशय तथा यौनांग विकिसत होते हैं।
  3. भुजंगासन करने से मानव शरीर की ज्ञानेन्द्रियों की शक्ति बढ़ जाती है।
  4. भुजंगासन करने से शरीर में कोलेस्ट्राल नही जमा होता है। यदि शरीर पहले से मोटापा का शिकार हैं तो आनावश्यक कोलेस्ट्राल नष्ट होकर मोटापा दूर हो जाता है तथा शरीर सुडौल हो जाता है। बढ़ा हुआ पेट कम हो जाता है। वजन सन्तुलित हो जाता है।
  5. भुजंगासन करने से स्त्रियों का मासिक धर्म सन्तुलित रहता है। यदि पूर्व से अनियमित हैं या अधिक या कम रक्तस्राव होता हो तो ये शिकायतें दूर हो जाती हैं।
  6. भुजंगासन करने से वक्ष, गर्दन, मुख एवं सिर अत्यधिक क्रियाशील हो जाते हैं। शरीर के ऊपर वाले भाग में विशेष कर क्रियाशीलता बढ़ती है। फेफड़े मजबूत हो जाते हैं। कन्धे और गर्दन के तनाव दूर हो जाते हैं। रीढ़ की हड्डी मजबूत तथा लचीली हो जाती है। कूल्हों का मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं।
  7. भुजंगासन करने से मानव शरीर के मेरुदण्ड के समस्त विकार नष्ट हो जाते हैं तथा मेरुदण्ड पूर्णतया लचीला हो जाता है।
  8. भुजंगासन करने से मानव शरीर में एक विशेष शक्ति एवं स्फूर्ति का संचार होता है, पेट के रोग (जैसे- कब्ज, बदहज्मी, गैस, एसिडिटी, डकार आना आदि समस्याएं) नष्ट हो जाते हैं तथा भूख में वृध्दि होती है।
  9. भुजंगासन करने से कोष्ठबध्दता, स्वप्नदोष, साइटिका, वायु विकार एवं मसाने के रोग नष्ट हो जाते हैं तथा शरीर कान्तिवान बन जाता है और तनाव से मुक्ति मिल जाती है।
  10. भुजंगासन करने से मानव शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त संचार सन्तुलित हो जाता है।

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