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पेट कम करने के लिए 13 योगासन

पेट कम करने के लिए 13 योगासन 

मोटापा मनुष्य का निकटतम प्रबल शत्रु है जो कि एक नही अनेक रोगों को जन्म देता है। वैसे तो मोटापा दूर करने के तमाम आसन हैं। यहां पर मोटापा दूर करने के 13 अत्यन्त महत्वपूर्ण योगासनों का वर्णन किया जा रहा है। जो कि ये हैः त्रिकोणासन, गरुणासन, उत्कटासन, हस्तपादागुष्ठासन, पदमासन, ताड़ासन, कपालभांति, हलासन, पवन मुक्तासन, मयूरासन, शलभासन, मत्स्यासन तथा धनुरासन।

1. त्रिकोणासन

इस आसन को करते समय मनुष्य के शरीर की मुद्रा त्रिकोण की तरह हो जाती है, इसीलिए इस आसन को त्रिकोणासन कहा जाता है। यह मोटापा कम करने का उत्तम योगासन है। इस आसन को नियमित रूप से करने से हाथ, पैर, पेट व कमर में खिंचाव आने से मांस पेशियां मजबूत होती हैं। कोलेस्ट्राल घटता है तथा मोटापा कम हो जाता है।

त्रिकोणासन करने की विधिः

खुले एवं प्राकृतिक वायुयुक्त स्थान पर जमीन पर चटाई बिछा कर दोनों पैरो के मध्य करीब ढाई फुट की दूरी बना कर उस पर खड़े होकर धीरे-धीरे सांस खींचते हुए दोनों हाथों को अपनी अपनी दिशा में उठा कर कन्धों की सीध में ले आएं। कन्धों को उठाते समय तना हुआ रखें। इस प्रकार दोनों हाथ एक सीध में आ जाएंगे। सांस खींचकर कुछ देर तक रोंकें। अब सांस छोड़ते हुए दाहिना हाथ झुकाएं ताकि वह दाहिने पैर को छू सके और शरीर के मोड़ के साथ दूसरे हाथ को ऊपर की तरफ ताने हुए मोड़े। दाहिने पैर के अंगूठे को धीरे-धीरे छूने का प्रयत्न करें। अंगूठे को छूने के बाद सिर ऊपर की तरफ उठाकर चेहरा सामने की तरफ रखें। कुछ देर तक इसी अवस्था में रुकें तथा फिर आसन छोड़ें। अब इसी क्रिया को बायें हाथ से छुएं।

2. गरुड़ासन

इस आसन को करते समय शरीर की मुद्रा गरूड़ के समान हो जाती है, इसीलिए इस आसन को गरुड़ासन कहते हैं। यह योगासन हार्निया रोग का उत्तम रसायन है। इस योगासन के नियमित अभ्यास से हाथ, पैर तथा पेट की मांशपेशिया सृदृढ़ व सुडौल हो जाता है। पेट कम हो जाता है।

गरुड़ासन करने की विधिः

सर्वप्रथम दोनों पैर को जमीन पर जमाकर बायें पैर को ऊपर उठाकर शरीर के सन्तुलित करें, तदोपरान्त बायीं टांग को दाहिनी टांग पर सांप की तरह लपेटें। दोनों हाथों को आपस में मिलाकर हाथों की कलाइयों को नाक के अग्रभाग पर सटाकर बन्द कर दें। 5 से 7 सेकेण्ड के बाद टांगों को आपस में बदल लें।

3. उत्कटासन

इस आसन में नितम्ब को हवा में उठा कर बैठने की मुद्रा की जाती है जिस के कारण इसे उत्कटासन कहा जाता है। इस योगासन को 5 से 10 मिनट करना चाहिए। इस योगासन के नियमित अभ्यास से कमर दर्द, गठिया, पथरी, साइटिका, हार्निया रोग में काफी लाभ होता है। हाथ, पैर तथा पेट का मांशपेशिया सुदृढ़ हो जाता है, पेट कम हो जाता है।

उत्कटासन करने की विधिः

दोनों पैरों को समानान्तर करके जमीन पर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाएं, दोनों हाथ कमर पर रख लें, दोनों पैरों के घुटनों को मोड़ते हुए कुर्सी पर बैठने की मुद्रा बनाएं। दोनों जांघ एवं दोनों घुटनों की की स्थिति सम रेखा में होनी चाहिए। दोनों पैरों के घुटने तथा अंगूठे सम रेखा में हों। दोनों घुटने 75 डिग्री का कोण बनाएं। धीरे-धीरे दोनों गुठनों को मोड़ते हुए रेचक करें। कुछ देर रुकें। धीरे-धीरे पूर्क करते हुए उठ जाएं।

4. हस्तपादागुष्ठासन

इस आसन में हाथ से पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं जिसके कारण इस आसन को हस्तपादागुष्ठासन कहा जाता है। इस योगासन को नित्य प्रति करने से हाथ, पैर था पेट का मांशपेशियां मजबूत तथा लचीली हो जाता है, पेट कम हो जाता है।

हस्तपादागुष्ठासन करने की विधिः

दोनों पैरों को घुटनो कों सीधा करके पैरों को आपस में मिलाकर सीधे खड़ें हो जाएं। दाहिने पैर को तान कर धीरे-धीरे ऊपर उठाएं, दाहिने पैर के अंगूठे को दाहिने हाथ से पकड़ लें। 5 से 7 सेकेण्ड तक इस अवस्था में रहने के बाद यही क्रिया दूसरे पैर व हाथ से करें।

5. पदमासन

इस आसन को करते समय पदम के समान आकृति हो जाती है जिसके कारण इसे पदमासन कहा जाता है। इस योगासन का नियमित अभ्यास करने से कब्ज, गठिया, फाइलेरिया आदि रोग दीर हो जाता हैं। पाचन शक्ति बढ़ती है, शरीर की अनावश्यक चर्बी समाप्त हो जाती है। पेट कम हो जाता है।

पदमासन करने की विधिः

भूमि पर चटाई विछाकर आसन लगाकर अपने दोनों हाथों को सामने की तरफ फैला कर बैठ जाएं। दाहिने पैर की पिण्डली तथा पैरों को पकड़ कर धीरे-धीरे दोनो पैर के घुटनों को मोड़ें। दाहिने पैर के पंजे तथा गट्टो को पकड़ लें तथा दाहिने पैर को थोड़ा ऊपर उठाते हुए अन्दर की तरफ खींच लें। दाहिने पैर की एड़ी बाये पैर की जांघ से लगा कर कस लें। बायें पैर को घुटने से मोड़ कर गट्टे को बाये हाथ से तथा पंजे को दाहिने हाथ से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाये । बायें पैर का एंड़ी को दाहिने पैर की जांघ की जड़ में सटा दें। दोनों हाथों का उंगलियों को ज्ञान मुद्रा में कर के दोनों पैरों के घुटनों पर रखकर ध्यान लगाएं। यह योगासन 5 से 10 मिनट तक करना चाहिए।

6. ताड़ासन

इस आसन में शरीर की स्थिति ताड़ के वृक्ष के समान हो जाती है जिसके कारण इसे ताड़ासन कहा जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास करने से हाथ, पैर तथा पेट की मांस पेशियां सुदृढ़ हो जाती हैं, मोटापा घट जाता है, पेट कम हो जाता है।

ताड़ासन करने की विधिः

दोनों पैर को मिला कर  दोनों पंजों को 45 डिग्री के कोण पर रखकर जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं, शरीर सीधा रखते हुए लम्बी गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाएं, कुम्भक लगाएं। हथेली को सामने की तरफ रखें, एड़ियों को उठा कर पंजों के बल खड़े होकर शरीर को तान दें। 7 से 8 सेकेण्ड तक इसी अवस्था में रहें। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए दोनों हाथ नीचे लाएं, एड़ियों को जमीन पर टिका कर आसन खोल दें।

7. कपालभांतिः

कपालभांति को सेहत का खजाना कहा जाता है। पेट की चर्वी कम करने के लिए यह एक अति महत्वपूर्ण योगसन है। यह आसन खाली पेट करना चाहिए। इस आसन को करने से शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं, श्वास नली तथा मस्तिष्क की सफाई हो जाती है, पेट की आंतो सुदृढ़ एवं मलायम हो जाती हैं। पेट की चर्वी कम हो कर मोटापा घट जाता है।

कपालभांति करने की विधिः

जमीन पर चटाई विछाकर पदमासनमें बैठ कर दोनों आंखे बन्द कर लें, दोनों हाथ के पंजों को दोनों पैर को घुटनों पर रखें। जल्दी-जल्दी सांस लें और छोड़ें। इस क्रिया में तनिक भी विश्राम नही होना चाहिए। प्रारम्भ में एक सेकेण्ड में एक रेचक, बपाद में दो रेचक तथा तीन रेचक करना चाहिए। प्रातः काल एवं सायंकाल 11-11 रेचकों के चक्र चलाते हुए प्रत्येक सप्ताह एक चक्र की वृध्दि करें। प्रत्येक चक्र के बाद थोड़ा सा विश्राम करें। चक्र पूरण होने के पहले न रूका जाय।

8. हलासन

इस योगासन में हल के आकार की मुद्रा बन जाती है जिसके कारण इसे हलासन कहा जाता है। यह आसन कठिन तो है परन्तु पेट कम करने का अत्यन्त कारगर योगासन है। इस आसन को नित्य प्रति करने से मोटापा दूर होकर पेट कम हो जाता है।

हलासन करने की विधिः

जमीन पर कम्बल ये चटाई बिछा कर कमर के बल लेट जाएं, दोंनों हाथ को कमर से सटायें, धीरे-धीरे दोनों पैरों को उठा कर 90 डिग्री तक ले जाएं, पैरों के साथ पीठ को भी उठाएं, पैरों को पीछे ले जा कर अंगूठों से जमीन के छुएं, कुछ देर रूकें। पूर्व की अवस्था में लौट आएं। यह आसन थोड़ा-थोड़ा विश्राम करके 3 से 4 बार करें।

9. पवन मुक्तासन

इस आसन के माध्यम से पेट अपानवायु से मुक्त हो जाता है, इसीलिए इसे पवन मुक्तासन कहा जाता है। इस आसन को नियमित करने से अपानवायु पेट से बाहर निकल जाती है, पेट की चर्वी कम हो जाती है तथा मोटापा घटता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत तथा लचीली हो जाती है।

पवन मुक्तासन करने की विधिः

जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं, दोनों हाथ व पैर सीधा रखें। दोनों हाथों की कैंची बना कर बायीं टांग को पकड़ कर घुटने से मोड़ते हुए पेट से सटा लें। रेचक करते हुए कुम्भक लगाएं। घुटने को नीचे की तरफ दबाते हुए छाती से लगाएं। गर्दन को ऊपर उठाते हुए नाक को घुटने से लगाएं। कुछ देर रुकें। अब यही क्रिया दाहिनी टांग से करें। इस आसन के 6 से 8 बार करें।

10. मयूरासन

इस आसन में शरीर की स्थिति मयूर के आकृति की हो जाती है, इसलिए इसे मयूरासन कहा जाता है। यह कठिन आसन है। इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए। इस आअसन को नियमित करने से मधुमेह रोग नही होता, पेट की फालतू चर्बी समाप्त हो कर पेट कम हो जाता है।

मयूरासन करने की विधिः

पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, दोनों बाहें कन्धे से पेट तक शरीर के साथ चिपका रहे, कुहनियां मुड़ी रहें। दोनों हाथ की हथेलियों को जमीन पर रख कर उन पर जोर देते हुए सिर से पैर तक सम्पूर्ण शरीर को ऊपर उठायें। जितनी देर रूक सकें, रुकें। पुनः पूर्व की स्थिति में वापस जाएं । इस आसन को 4 से 5 बार करें।

11. शलभासन

इस आसन में शरीर की स्थिति शलभ के आकृति की हो जाती है, इसलिए इसे शलभासन कहा जाता है। यह एक कठिन आसन है। इस योगासन के नियमित उपयोग से हार्निया, मधुमेह तथा पेट के रोग दूर हो जाते है, पेट कम हो जाता है।

शलभासन करने की विधिः

पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, दोनों हाथों की हथेलियों को जांघों से दबाते हुए बाहों को तान दें, ठोड़ी तनी हो, दोनों पैरों का एड़ियां परस्पर सटी हो। पूरक सासं ले तथा बाहों, हाथों व छाती पर दबाव डालते हुए दोनों टांगों को इस प्रकार ऊपर ऊठाएं कि दोनों टांगे परस्पर सटी हों तथा सीधा हों और पेट की नाभि जमीन से ऊपर उठ जाएं। कुम्भक लगाएं। इस अवस्था में 6 से 8 सेकेण्ड तक रूकें। धीरे-धीरे सांस बाहर निकालते हुए पैरों को जमीन से लगाकर आसन तोड़ें। इस आसन के 5 से 10 बार तक करें।

12. मत्स्यासन

इस आसन में शरीर की आकृति मछली के समान हो जाती है, इसीलिए इसे मत्स्यासन कहा जाता है। इस आसन के नियमित रूप से करने से मस्तिष्क, फेफड़ें, गला,कान, आंख व नाक एवं पेट के समस्त विकार नष्ट हो जाते हैं तथा पेट कम हो जाता है।

मत्स्यासन करने की विधिः

जमीन पर पद्मासन लगाकर बैठ जाएं, कुहनियों की सहायता से धीरे-धीरे जमीन पर चित्त लेट जाएं। सिर को पीछे की तरफ जमीन पर झुकाते हुए शीने को उठायें, गर्दन पीछे की तरफ झुकाएं। 10 सेकेण्ड तक रुकें। हाथों पर जोर देकर माथा शिथिल कर दें, कुहनियो पर जोर देकर धीरे-धीरे उठ कर बैठ जाएं। पदमासन तोड़ दें।

13. बध्दपदमासन

पेट कम करने के लिए यह एक अति प्रभावशाली योगासन है। इस योगासन का नियमित अभ्यास करने से बल, बुध्दि तथा विवेक विकसित होता है। लिकोरिया, मासिक धर्म, गर्भाशय सम्बन्धी विकार नष्ट हो जाते हैं। कोलेट्राल घट जाता है तथा पेट कम हो जाता हैं।

बध्दपदमासन करने की विधिः

पदमासन की मुद्रा में जमीन पर बैठ जाएं। दोनों एड़ियों को पेट के निचले भाग से सटा दें। पैर के पंजों को जांघों से बाहर  निकाल कर दोनों तरफ की कमर से लगा लें। बायीं भुजा को पीठ के पीछे कर के बांधे। बायें हाथ से दाहिने पैर का अंगूठा तथा दाहिने हाथ से बाएं पैर का अंगूठा पकड़ें। गहरी सांस लेकर कुम्भक लगाएं। 6 से 8 सेकेण्ड तक सांस रोंके। पुनः सांस छोड़ें तथा कुम्भक लगाएं। आठों चक्र का ध्यान लगाएं।

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