Yoga

सूर्य नमस्कार के फायदे, नियम और करने का तरीका

सूर्य नमस्कार क्या है ? 

सूर्य नमस्कार दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें सूर्य का अर्थ सूरज से हैं। वहीं, नमस्कार का अर्थ होता है नमन या प्रार्थना करना। यही कारण है कि प्राचीन समय से ही लोग सुबह उठकर सूर्य की प्रार्थना करने के लिए सूर्य नमस्कार योग से दिन की शुरुआत शुभ मानते हैं। इस योग की प्रक्रिया 12 चरणों में पूरी होती हैं और हर चरण में एक अलग आसन का अभ्यास किया जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि एक ही योग में 12 योगासनों की क्रमबद्ध शृंखला को सूर्य नमस्कार कहा जाता है।

सूर्य नमस्कार क्या है, यह जानने के बाद हम लेख के अगले भाग में सूर्य नमस्कार के फायदे से संबंधित जानकारी देंगे।

सूर्य नमस्कार के नियम

  1. सभी आसनों में एकमात्र सूर्य नमस्कार ही ऐसा आसन है जिसे मात्र सूर्योदय के समय तथा पूरब दिशा की तरफ मुख करके किया जाता है।
  2. सूर्य नमस्कार में 12 चरण होते हैं, सभी चरण को पर्याप्त जोश एवं उर्जा के साथ किया जाना चाहिए।
  3. सूर्य नमस्कार करते समय सांस लेने तथा छोड़ने का विशेष ध्यान रखा जाता है।
  4. सूर्य नमस्कार करते समय इस बात का पूर्णतया ध्यान दिया जाये कि किसी भी चरण में शरीर के किसी भी भाग में कोई झटका न लगने पाये।
  5. सूर्य नमस्कार के प्रत्येक चरण को प्रसन्नचित्त मुद्रा में धीर-धीरे करना चाहिए। ऐसा करने से सूर्य नमस्कार का पूर्ण लाभ मिलता है।

सूर्य नमस्कार करने का तरीका

सूर्य नमस्कार में कुल 12 चरण होते हैं जिसे करनें का चरणवार तरीका निम्नवत हैः

प्रथम चरणः सूर्य की तरफ मुख कर के कम्बल या चटाई पर सीधे खड़े हो जाएं, दोनो पैरे की एड़ियां परस्पर सटी रहें, पंजे खुले रहें। इस स्थिति में दोनो हाथ की हथेली आपस में मिलाकर प्रणाम की मुद्रा में होकर “ओम मित्राय नमः” मन्त्र का जाप करते हुए सूर्य देवता को प्रणाम करें।

द्वितीय चरणः शरीर को सावधान की मुद्रा में पूरी तरह सीधा रखते हुए गहरी सांस लें। दोनों हाथ ऊपर उठाएं। कुम्भक करें। दोनों हाथ को पूरी तरह तान कर हथेलियों को आसमान की तरफ खोल कर ताने रहें। कमर से पीछे की तरफ झुकाएं। दोनों पैर, हाथ तथा पूरा शरीर तना रहे। इस चरण के दौरान “ओम रवये नमः” मन्त्र का जाप करें।

तृतीय चरणः दोनों हाथ की हथेलियों को ताने हुए कुम्भक करें। धीरे-धीरे सीधे हो जाएं तथा रेचक करें। दोनो हाथों को दोनों पैरों के सामने कुछ हट कर दोनों तरफ जमाइये। झुकते हुए सिर को घुटनों से लगाकर हाथ को धीर-धीरे सरकाते हुए पैरों के दोनों तरफ जमाइय़े। इस चरण के दैरान “ओम सूर्याय नमः” मन्त्र का जाप करें।

चतुर्थ चरणः गहरी सांस भरते हुए बायें पैर को आगे ले जाएं तथा दाहिना पैर पीछे की तरफ तान दें। शरीर का पूरा भार दोनों हाथ के पंजों पर रहें। पीठ को थोड़ा से नीचे दबाकर दाहिने पैर के घुटने तथा पंजे से पृथ्वी को स्पर्श करें। उक्त क्रिया के दौरान “ओम मानवे नमः” मन्त्र का जाप करें।

अब उक्त क्रिया को पुनः करते पुनः गहरी सांस भरते हुए दाहिने पैर से दोहराएं यानी दाहिने पैर को आगे लाकर बायां पैर पीछे की तरफ फैला दें, तदुपरान्त उसके पंजे तथा घुटने से पृथ्वी का स्पर्श करें।

पंचम चरणः दोनों हाथों को आगे की तरफ कन्धों के समानान्तर सीधा जमान पर जमाएं तथा दोनों टागों पैरों को पीछे कर के ताने, सिर को सीधा कर के सूर्य की तरफ देखें और रेचक करते हुए “ओम खगाय नमः” मन्त्र का जाप करें।

षष्टम चरणः कुम्भक लगाते हुए दोनो हाथ तथा पंजें को जमान पर जमाएं, बाजुओं को केहुनी से मोड़ कर माथा, छाती एवं घुटनों को जमीन पर टिका दें। शरीर का भार पैरों के पंजों तथा हाथों की हथेलियों पर रहे। इस चरण के दौरान “ओम पुष्णे नमः” मन्त्र का जाप करें।

सप्तम चरणः पूरक करते हुए दोनों हाथ की हथेलियों को जमीन पर जमाएं, बाहों को सीधा कर के दोनों टांगों को धीरे-धीरे पीछे की तरफ फैला कर जमाएं, सिर तथा छाती को तान कर आकाश में सूर्य की तरफ देखते हुए ओम हिरण्य गर्भाय नमः मन्त्र का जाप करें।

आठवीं अवस्थाः रेचक करते हुए दोनों पैरों को हाथों की तरफ कर के कमर से मोड़ कर नितम्बों को ऊपर उठाएं, दोनों हाथों के मध्य से सिर को अन्दर की तरफ लाते हुए “ओम मरीचये नमः” मन्त्र का जाप करते हुए दोनों पैरों के घुटनों को देखें, पूरा शरीर तना रहें।

नवीं अवस्थाः पूरक करते हुए बायीं टांग को घुटने से मोड़ कर सामने लाएं, बाएं पैर को दोनों हाथों के मध्य जमाकर चौथे चरण की मुद्रा की भांति दाहिनी टांग को फैलाएं। कुम्भक करते हुए “ओम आदिव्याय नमः” मन्त्र का जाप करते हुए आकाश में सूर्य की तरफ देखें। इस क्रिया में आगे की तरफ झुक कर दोनों हाथ भूमि पर जमाएं।

दसवीं अवस्थाः सावधान की मुद्रा में खड़े हो कर दोनों हाथों को सामने की तरफ झुकते हुए जमीन पर झुकाएं  तथा रेचक करते हुए तीसरे चरण की क्रिया में आएं। कुम्भक करते हुए “ओम सुविये नमः” मन्त्र का जाप करते हुए सिर को घुटनों से लगाएं।

ग्यारहवीं अवस्थाः पूरक करते हुए सीधा खड़े हो जाएं, दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए कुम्भक लगाएं। दूसरे चरण की क्रिया के अनुसार गर्दन, सिर, पीठ एवं बाहों को पीछे की तरफ झुकाएं। टांगों को तना रखें। मन ही मन “ओम अकार्य नमः” मन्त्र का जाप करें।

बारहवीं अवस्थाः रेचक करते हुए दोनों पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं, कुम्भक लगाते हुए पहले चरण की मुद्रा में आएं। प्राणायाम की मुद्रा में दोनों हाथों को जोड़ कर छाती के पास रखें, खड़े होने की सावधान मुद्रा में रहें तथा “ओम भाष्कराय नमः” मन्त्र का जाप करते हुए सूर्य की तरफ देखें।

इस प्रकार 12 चरणों में सूर्य नमस्कार का एक अभ्यास पूरा होता है। वैसे तो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार का 8 से 9 बार अभ्यास पर्याप्त है परन्तु धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 108 बार तक किया जा सकता है।

सूर्य नमस्कार करने के फायदे

प्रतिदिन नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने पर शारीरिक, मानसिक शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा याददास्त में वृध्दि होती है। श्वसन संस्थान मजबूत होता है। मांसपेशियां, स्नायु मजबूत हो जाती हैं। ग्रन्थियां पुष्ट हो जाती है। शरीर ओजवान हो जाता है। सूर्य नमस्कार वयस्कों, बुजुर्गों तथा स्त्री पुरुष सभी के लिए लाभदायक हैं।

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