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थायराइड के लिए बेहद आसान और फायदेमन्द योग – 7 Best Yoga for Thyroid in Hindi

थायराइड के लिए बेहद आसान और फायदेमन्द योग

पुराणों व वेदों के अनुसार भारत में योग की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। हमारे ऋषि मुनि योग को तपोबल पर हजारों वर्ष तपस्या करते थे तथा विभिन्न सिध्दियां प्राप्त करते थे। नियमित योग करने पर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शान्ति भी मिलती है। आज कल के आनियमित खान-पान, रहन-सहन के कारण नाना प्रकार की बीमारियां जन्म ले रही हैं। उन्ही में से एक बीमारी थायरायड की समस्या है जो आज कल आम बीमारी हो गयी है। हालांकि थायरायड कोई बीमारी नही हैं, बल्कि एक ग्रन्थि हैं जो शरीर के मेटाबालिज्म को नियन्त्रित करने का कार्य करती है। थायरायड ग्रन्थि दो प्रकार के हार्मोन (ट्राईआयोडोथायरोनिन तथा थायराक्सिन) उत्पन्न करती है। थायराइड ग्रन्थि से उत्पन्न होने वाले उक्त दोनों हार्मोन जब असन्तुलित हो जाते हैं तो शरीर का वजन घटने या बढ़नें लगता है जिसे थायराइड समस्या कहा जाता है। कुछ ऐसे योग हैं जिनके नियमित एवं सही अभ्यास से थायराइड की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

1. सर्वांगासन

सर्वांगासन से मानव शरीर के गर्दन तथा अन्य भागों में खिंचाव आता है। सर्वांगासन के नियमित एवं सही अभ्यास से गर्दन में खिंचाव के कारण रक्त संचार नियमित हो जाता है तथा थाइरायड ग्रन्थि में उत्तेजना होने के कारण थाइरायड के हार्मोन सन्तुलित हो जाते है जिससे थायराडड की समस्या से निजात मिल जाती है। यदि थायराइड की सम्स्या गम्भीर हो गयी है तो इस आसन के साथ-साथ चिकित्सक से सम्पर्क करके इलाज भी कराना चाहिए। उच्च रक्त चाप, हार्निया तथा कमर दर्द के रोगी व्यक्ति को सर्वांगासन नही करना चाहिए।

सर्वांगासन करने की विधि

जमीन पर कम्बल या स्व्च्छ वस्त्र बिछा कर पीठ के बल लेट जाएं, दोनों हाथों को शरीर से सटा लें। दोनों हाथ की कुहनी को जमीन पर टिकाते दोनों हाथ के पंजों से पीठ को बल देकर दोनों पैर, कुल्हे व कमर को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठा लें त,था सीधा कर लें। घुटने तथा पैर परस्पर मिलें हों। इस अवस्था में डेढ़ से दो मिनट तक रूकें, गहरी सांस लें। पैरों को धीरे-धीरे वापस पीछे ले जाएं, कमर व हाथ को धीरे-धीरे सीधा करते हुए जमीन पर लाएं, पैरो को जमीन पर लाएं।

2. हलासन

इस योगासन में हल के आकार की मुद्रा बन जाती है जिसके कारण इसे हलासन कहा जाता है। हलासन का नित्य प्रति सही तरीके से अभ्यास करने से थायरायड तथा मोटापे की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। सर्वाइकल तथा उच्च रक्तचाप के रोगी को हलासन नही करना चाहिए।

हलासन करने की विधि

जमीन पर कम्बल ये चटाई बिछा कर कमर के बल लेट जाएं, दोंनों हाथ को कमर से सटायें, धीरे-धीरे दोनों पैरों को उठा कर 90 डिग्री तक ले जाएं, पैरों के साथ पीठ को भी उठाएं, पैरों को पीछे ले जा कर अंगूठों से जमीन के छुएं, कुछ देर रूकें। पूर्व की अवस्था में लौट आएं। यह आसन थोड़ा-थोड़ा विश्राम करके 3 से 4 बार करें।

3. उज्जायी प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम थायरायड समस्या का सर्वोत्तम उपचार योग हैं। उज्जायी प्राणायाम करने से थायराइड ग्रन्थि कम्पायमान हो जाती है जिसके कारण इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से थायराइड समस्या से निजात मिल जाती है। निम्न रक्त चाप के रोगी को इस प्राणायाम के नही करना चाहिए।

उज्जायी प्राणायाम करने की विधि

जमीन पर मैट या कम्बल बिछाकर पदमासन में बैठ जाएं, गले को टाइट कर सांस लेते हुए सीने को फुलाएं। ठोंड़ी को छाती से स्पर्श कराएं। जितनी देर हो सके सांस रोकें। धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

4. धनुरासन

इस योगासन को नियमित अभ्यास थायरायड की समस्या में लाभकारी है। पथरी, अल्सर या हार्निया के रोगी को इस योगासन को  नही करना चाहिए।

धनुरासन करने की विधि

जमीन पर मैट या कम्बल बिछा कर पेट के बल लेट जाएं, गहरी सांस लेते हुए दोनों पैर के घुटनों को मोड़ लें, दोनों टखनों को दोनों हाथों से पकडें। गहरी सांस लेते हुए सिर, छाती तथा जांघ को ऊपर उठाएं। कुछ देर तक इस अवस्था में रुकें, धीरे-धीरे सांस छोड़ें। गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे शरीर को नीचे ले आएं तथा प्रारम्भिक अवस्था में आ जाएं।

5. कपालभांति प्राणायाम

थायरायड की समस्या से निजात पाने के लिए कपालभांति प्राणायाम सबसे अच्छा प्राणायाम है। अल्सर, हार्निया, उच्च रक्त चाप तथा अस्थमा रोग से पीड़ित व्यक्ति को कपालभांति प्राणायाम नही करना चाहिए।

कपालभांति प्राणायाम करने की विधि

जमीन पर पदमासन में बैठ जाएं, मुख बन्द कर के नाक से धीरे-धीरे सांस लें, सांस लेते समय पेट अन्दर की तरफ जायेगा, धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह क्रिया 5 से 10 मिनट तक करें। बीच में थक जाने पर रूक कर थोड़ा आराम कर के पुनः करें।

6. सेतु बंधासन

सेतु बंधासन का व्यापक प्रभाव गर्दन पर पड़ता है जिसके कारण थायरायड समस्या से निजात दिलाने में बेहद असरकारक है। जिसके कमर, गर्दन तथा कन्धों में दर्द होता हो, उसे सेतु बंधासन नही करना चाहिए।

सेतु बंधासन करने की विधि

जमीन पर बीठ के बल लेट जाएं, दोनों हाथ सीधा कर लें। दोनों पैर को घुटनों को मोड़ते हुए जांघ तक लाएं, गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथ को जमीन पर ही टिकाते हुए जांघ तथा कमर को ऊपर उठाएं। थोडी देर रुकें सांस छोड़ें। धीरे-धीरा प्रारम्भिक अवस्था में वापस लौटें। इस योगासन को प्रारम्भ में 5 मिनट तथा बाद में धीरे-धीरे बढ़ा कर 15 मिनट तक करना चाहिए।

7. बालासन

बालासन का नियमित अभ्यास कमर, पीठ तथा रीढ़ की हड्डी तथा थायरायड के रोगी के लिए लाभकारी है। गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप तथा आर्थ्राइटिस के रोगी को यह योगासन नही करना चाहिए।

बालासन करने की विधिः

जमीन पर बज्रासन में बैठ जाएं, गहरी सांस लेते हुए दोनो हाथों को एक सीध में सिर के ऊपर ले जाएं। धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामने की तरफ झुकें, दोनों हाथ की हथेलियां, केहुनी तथा सिर जमीन पर रखें, कुछ देर तक रुक कर सांस लेते व छोड़ते रहें। गहरी सांस लेते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं। इस योग को 5 से 10 मिनट तक करें।

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